फीस बढ़ोतरी से अवगत कराना होगा बोर्ड और अभिभावक को

सीबीएसइ ने तैयार किया सर्कुलर, स्कूलों को देनी होगी पूरी डिटेल आसनसोल. किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई. टयूशन फीस में कितनी बढ़ोतरी की. फीस बढ़ाने के पीछे कारण क्या है. अब इन तमाम सवालों का जबाब स्कूलों को पहले सीबीएसइ को देना होगा. बिना सीबीएसइ को सूचित किये और कारण बताये कोई भी स्कूल […]

सीबीएसइ ने तैयार किया सर्कुलर, स्कूलों को देनी होगी पूरी डिटेल
आसनसोल. किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई. टयूशन फीस में कितनी बढ़ोतरी की. फीस बढ़ाने के पीछे कारण क्या है. अब इन तमाम सवालों का जबाब स्कूलों को पहले सीबीएसइ को देना होगा. बिना सीबीएसइ को सूचित किये और कारण बताये कोई भी स्कूल अप्रैल 2017 से नया सत्र शुरू नहीं कर सकता है. इसे को लेकर सीबीएसइ की ओर से सकरुलर तैयार किया जा रहा है. दिसंबर में स्कूल बंद होने के पहले तमाम स्कूलों को यह सर्कुलर भेजा जायेगा. फीस बढ़ोतरी के अलावा स्कूलों को किताबों की लिस्ट भी बोर्ड को भेजनी होगी. यह लिस्ट क्लास वाइज होगी. किस क्लास में कितनी किताबें है और इसमें एनसीइआरटी की कितनी किताबें है यह भी बताना होगा.
20 मार्च तक देना होगा स्कूलों को जवाब
फरवरी और मार्च में फाइनल एग्जाम होने के बाद स्कूलों को इसकी जानकारी बोर्ड को उपलब्ध करवाना होगा. बोर्ड ने इसके लिए 20 मार्च तक का समय स्कूलों को दिया है. अप्रैल में सत्र शुरु होने से पहले स्कूलों को जबाब देना है.
स्कूल की मनमानी पर लगेगी रोक
सीबीएसइ द्वारा स्कूलों से फीस बढ़ोतरी की जानकारी लेने से अभिभावक को इसका काफी फायदा होगा. कोई भी स्कूल इस बार मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा पायेंगे क्योंकि सीबीएसइ को फीस बढ़ाने के साथ कारण भी बताना होगा.
स्कूल बैग का बोझ पड़ता है जेब पर भारी
अधिकांश स्कूलों में प्राइवेट पब्लिकेशन की ही किताबें चलती हैं. एक-एक विषय की दो से तीन किताबें चलती हैं. हर क्लास में 12 से 20 किताबों का बोझ छात्रों पर रहता है. इसका सबसे ज्यादा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ता है क्योंकि एक क्लास की सारी किताबों की खरीदारी में चार से पांच हजार रुपये का खर्च आता है. स्कूल बैग का बोझ न सिर्फ बच्चों के ऊपर बल्कि अभिभावकों की जेब पर भी हर साल पड़ता है. अभिभावक कहते हैं कि टयूशन फीस के अलावा हर वर्ष अतिरिक्त शुल्क जैसे बस किराया, एनुअल फीस, कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास फीस भी बढ़ा दी जाती है.
हर साल बढ़ जाती है स्कूलों की टयूशन फीस
अधिकतर प्राइवेट स्कूल मरजी से फीस में बढ़ोतरी करते हैं. इसमें टयूशन फीस के साथ एडमिशन फीस भी शामिल होता है. हर स्कूल नये सत्र के पहले 15 से 20 फीसदी तक फीस में बढ़ोतरी करते हैं. इसका सीधा असर अभिभावकों के पॉकेट पर पड़ता है. इससे काफी परेशानी होती है.
टीचर्स की सैलरी के नाम पर होती है बढ़ोतरी
इसके अलावा स्कूलों को बोर्ड को इसकी भी जानकारी देना होगा कि फीस बढ़ाने के साथ स्कूल में छात्रों को सुविधाएं क्या बढ़ायी गयी है? सुविधा बढ़ाने पर ही फीस बढ़ोतरी की जा सकती है. ज्ञात हो कि अधिकांश स्कूल टीचर्स की सैलरी के नाम पर फीस में बढ़ोतरी करते हैं. टीचर्स की सैलरी के नाम पर फीस बढ़ोतरी करनेवाले स्कूल पर बोर्ड कारवाई करेगा.
बढ़ोतरी की जानकारी लेने से अब छात्रों को मिलेगी राहत
फीस बढ़ाने का कारण बताने पड़ेंगे
इससे स्कूल को फीस बढ़ाने में मुश्किल होगी
युनिफॉर्म में भी बदलाव नहीं कर पायेंगे स्कूल
किताबों की जानकारी देने से प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें स्कूल में नहीं चल पायेगी
एनसीइआरटी बुक चलाना अब स्कूल की मजबूरी हो जायेगी
बच्चों के बस्ता का बोझ कम होगा
डेवलपमेंट के साथ अन्य चीजों के नाम पर पैसे नहीं वसूल पायेंगे
नामांकन की शिकायत तुरंत सीबीएसइ तक पहुंच जायेगी

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