आसनसोल. इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के प्रभारी अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) आरआर मिश्र ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता का पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराना है. वे डब्ल्यूसीएल के पूर्णकालिक सीएमडी है. प्रभार लेने के बाद वे सोमवार को इसीएल के दोदिवसीय दौरे पर कंपनी मुख्यालय पहुंचे. पूरे दिन उन्होंने विभिन्न स्तरों पर बैठकें की तथा संध्या में कोयला मंत्री पीयूष गोयल के वीडियो कांफ्रेंसिंग में शामिल हुए, जो कंपनी के डिजिटल भुगतान से जुड़ा हुआ था.
एक विशेष भेंट में प्रभारी सीएमडी श्री मिश्र ने कहा कि कंपनी का उत्पादन लक्ष्य 47 मिलियन टन कोयला है. इस लक्ष्य को हासिल करना होगा, क्योंकि इसके आधार पर ही ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता का कोयला पर्याप्त मात्र में दिया जा सकता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि कंपनी को क्वालिटी व क्वांटिटी दोनों पर ही ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि कंपनी के पास कुशल व अनुभवी अधिकारियों व कर्मियो की टीम है. उचित मार्गदर्शन में यह टीम हर लक्ष्य हासिल कर सकती है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अधिकारियों की बैठक में इस बात को पूरी गंभीरता से रखी है. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करना ही होगा, क्योंकि विफल होना इस टीम के लिए उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि पूरे दिन उन्होंने विभिन्न स्तरों पर बैठकें की है तथा कंपनी की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली है. मंगलवार को वे कंपनी के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही सोनपुर बाजारी परियोजना, झांझरा परियोजना तथा कुमारडीह कोलियरी का निरीक्षण करेंगे. इसके बाद वे कंपनी की रणनीति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जायेगी. उन्होंने कहा कि कंपनी तथा टीम के पास काफ ी संभावना है.
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कंपनी बीआइएफआर से बाहर आ गयी है. निश्चित तौर पर इसे मिनी रत्न कंपनी का दर्जा मिलना चाहिेए. बैठक में उनके सामने यह मुद्दा उटाया गया था. वे इस दिशा में पहल करेंगे. उन्होंने कहा कि मिनी रत्न कंपनी का दर्जा हासिल करने के लिए कुछ मानदंड़ निर्धारित है. वे कंपनी की स्थितियों से अवगत होकर इस सम्मान को दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे.
इसीएल में अपनी घर वापसी से जुड़े सवाल पर वे भावुक हो उठे. सनद रहे कि वर्ष 1994 से वर्ष 2004 तक उन्होंने इसीएल में तत्कालीन सीएमडी सचिवालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल डय़ूटी (ओएसडी) पद पर आसीन थे. उन्होंने कहा कि घर वापसी उनका भावनात्मक मुद्दा था. इस कंपनी के कर्मियों व अधिकारियों से वे काफी दिल से जुड़ चुके हैं.
व्यक्तिगत कारणों से उन्हें कंपनी से सीएमपीडीआइएल जाना पड़ा था. लेकिन छह महीने उन्हें मानसिक रूप से संभलने में लग गया था. अक्सरहां मन उचट जाता था और इसीएल लौटने की इच्छाएं हिलोरे लेने लगती थी. उन्होंने कहा कि इस कंपनी में लौटने की उनकी इच्छा तो हमेश ा से रही, लेकिन इतनी जिम्मेवारी से लौटना होगा, यह उन्होंने नहीं सोचा था. उस समय तथा इस समय की कंपनी की चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में कंपनी बीआइएफआर के अधीन थी. कंपनी को लगातार हो रहे घाटे से निकलना था. वे परिस्थितियां अलग थई. इस समय कंपनी बीआइएफआर से बाहर है.
मुनाफा कमा रही है. इस वित्तीय वर्ष में उसे 47 मिलियन टन कोयले के उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना है. इसके बाद कंपनी हर क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनायेगी.उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी की टीम हर क्षेत्र में बेहतर है.
