सांकतोड़िया : कोल माइंस पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (पूर्वी क्षेत्र) के अध्यक्ष शांति गोपाल मुखर्जी तथा महासचिव एसएन घोष ने कहा कि कोयला अधिकारियों व कोयला कर्मियों की पेंशन राशि के भुगतान में आनेवाले समय में संकट आ सकता है. उन्होंने कहा कि बीते 27 अक्तूबर को रानीगंज में एसोसिएशन की कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में लिये गये निर्णयों के अनुसार अवकाश प्राप्त कोयला श्रमिकों को पेंशन आदि की शिकायतों को दूर करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि कोल माइंस प्रोविडेंट फंड कार्यालय से आयी सूचना के अनुसार वर्ष 2021-22 तक पेंशन फंड खाली हो जायेगा. वर्ष 2021-22 के बाद कोयला श्रमिकों को पेंशन देना मुश्किल होगा. इससे कोयला श्रमिकों में हताशा है. ऐसे में सभी अवकाश प्राप्त कोयला श्रमिकों का जीवन दावं पर होगा. उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार कुल 4.71,069 अवकाश प्राप्त कोयला कर्मियों में 46048 को पांच सौ रुपये, 71743 को पांच सौ एक रुपये से लेकर एक हजार रुपये, 24330 को एक हजार एक रुपये से लेकर दो हजार रुपये, 37978 को दो हजार एक रूपये से लेकर पांच हजार और 45468 को पांच हजार एक रूपये से लेकर दस हजार रुपये तक की पेंशन राशि मिल रही है. सीएमपीएस 1998 के लागू होने के 18 वर्षो बाद भी पेशन की राशि बढ़ाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 तक पेंशन फंड का रिाव्यू भी नहीं किया गया. जबकि सीएमपीएस 1998 में प्रति तीन वर्ष पर इसके पुनरीक्षण का प्रावधान था. इस दौरान जीविकोपाजर्न के लिये मंहगायी भत्ता आदि सहित एनसीडब्ल्यू के तहत मौजूदा कम्रियों के न्यूनतम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन देने की मांग की गयी. कर्मियों और अधिशासी अधिकारियों (एक्जीक्यूटिवों) के लिये एक ही पेंशन योजना की मांग की.
