रूपनारायणपुर : नोटबंदी के निर्णय के बाद इन नोटों को बदलने के दौरान दिहाडी श्रमिकों के आय का जरिया अमिट स्याही लगाये जाने के कारण गुरु वार से बंद हो गया. पांच सौ और एक हजार रुपये के प्रतिबंधित नोट बदलने के लिए लंबी कतार में समय बर्बाद करने से बचने के लिए लोग अपने इलाके के किसी दिहाड़ी श्रमिक को दो सौ रु पये देकर बैंक में अपना नोट बदलने के लिए भेज दे रहे थे.
कुछ लोग अपनी काली कमाई के पैसे भी ऐसे ही लोगो के माध्यम से भेज रहे थे. जिससे एक ही आदमी का पैसा बदलने के लिए 20 से 30 लोग लाइन में लग जाते थे. पैसा बदलते ही वही आदमी पुन: लाइन में लग जाते थे. जिससे आम ग्राहकों को काफी परेशानी होती थी. कुछ दिहाड़ी श्रमिको को प्रतिदिन छह सौ से आट सौ रु पयों की कमाई हो रही थी. देंदुआ रामडी इलाके के निवासी शक्ति बाउरी ने कहा कि परिवार के चार सदस्य प्रतिदिन लाइन में लगकर 18 सौ से 22 सौ रु पये की आाय कर रहे थे.
बुधवार से उंगुली में अमिट स्याही लगने के बाद यह कार्य बंद हो गया. इसके साथ ही गुरु वार से नोट बदलने की लाइन में भीड़ कम होने लगी है. देंदुआ यूको बैंक के सामने सुबह से लेकर शाम तक हर समय तीन सौ से साढ़े तीन सौ लोगों की लाइन रहती थी. गुरुवार को 50 लोग ही लाइन में लगे.
नोटबंदी के निर्णय के बाद से ही बैंक, पोस्ट ऑफिस और एटीएम में पैसा बदलने, जमा करने और निकालने के लिए लोगों की लंबी लाइन नगने लगी है. ऐसे में कुछ लोगों ने कार्य विहीन हो चुके दिहाड़ी श्रमिको को बदले गए नोट का पांच से 10 प्रतिशत राशि देने का लालच देकर बैंक के सामने लाइन में खड़ा कराना शुरू कर दिया.
