पुरुलिया जिला कार्यालय में प्रदर्शन

विक्षुब्ध. टिकट बंटवारे को लेकर तृणमूल कांग्रेस में गहराया आपसी विवाद मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के स्तर से प्रार्थियों की सूची जारी होने तथा कई क्षेत्रों से विधायकों के टिकट काटे जाने से कई क्षेत्रों में भारी आक्रोश है. पुरुलिया में जयपुर क्षेत्र के प्रत्याशी को बदलने के लिए जिला कार्यालय पर प्रदर्शन […]

विक्षुब्ध. टिकट बंटवारे को लेकर तृणमूल कांग्रेस में गहराया आपसी विवाद
मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के स्तर से प्रार्थियों की सूची जारी होने तथा कई क्षेत्रों से विधायकों के टिकट काटे जाने से कई क्षेत्रों में भारी आक्रोश है. पुरुलिया में जयपुर क्षेत्र के प्रत्याशी को बदलने के लिए जिला कार्यालय पर प्रदर्शन हुआ तो दुर्गापुर (पूर्व) में किट नहीं मिलने पर विरोध में बैनर लगाये गये हैं तथा दीवार लेखन किया गया है.
आद्रा. पुरुलिया जिले के जयपुर विधानसभा के तृणमूल उम्मीदवार शक्तिपद महतो को बदले जाने की मांग को लेकर सैकड़ों तृणमूल नेता एवं कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को पुरुलिया शहर में रैली निकाली तथा जिला तृणमूल कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया. विरोध रैली में जयपुर प्रखंड के तृणमूल प्रखंड अध्यक्ष कीर्तन महतो तथा कई अंचल के नेता एवं कार्यकर्ता मुख्य रुप से शामिल थे.
नेतृत्व कर रहे कृष्ण महतो ने क हा कि जयपुर विधानसभा के तृणमूल उम्मीदवार दूसरी पार्टी से कुछ दिन पहले ही तृणमूल में शामिल हुये है. वर्ष 2011 के विधानसभा में शक्तिपद महतो कांग्रेस के लिए सक्रिय थे. वह गंठबंधन को नहीं मान कर तृणमूल के खिलाफ उम्मीदवार बने थे. चुनाव में मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया था तथा उनका पराजय हुयी थी.
इसके बाद भी इस चुनाव में उन्हें पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बना दिया गया. उन्होंने कहा कि पार्टी हाइ कमान के इस निर्णय से आम पार्टी कर्मियों के बीच काफी हताशा है. वे आम जनता क ेपास मतदान के लिए कैसे अपील कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता को इसका पैमाना बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि प्रत्याशी नहीं बदला गया तो क्षेत्र से पार्टी की पराजय तय है.
हालांकि तृणमूल के दूसरे पक्ष का कहना है कि वर्तमान समय में शक्तिपद महतो तृणमूल के टिकट पर जिला परिषद उम्मीदवार होकर चुनाव जीत चुके हैं तथा जिला परिषद में कृषि कर्माध्यक्ष भी है. इस कारण वह तृणमूल का उम्मीदवार है और उनके नाम का घोषणा ममता बनर्जी ने की है. उम्मीदवार को बदलने का कोई सवाल ही नहीं है. यदि उनका विरोध किया जाना था तो पंचायत चुनाव में क्यों नहीं किया गया.

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