टकराव. दक्षिण बंगाल के व्यवसायियों ने रखी बंदी टैक्स के खिलाफ
आसनसोल. कोलकाता छोड़ पूरे राज्य में वेस्ट बंगाल एग्रिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग (रेगुलेशन) एक्ट, 1972 लागू करने के विरोध में फेडरेशन ऑफ साउथ बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फॉस्बेक्की) के बैनर तले दक्षिण बंगाल के व्यवसायियों ने शनिवार को व्यवसायिक बंदी रखी. इसके कारण करोड़ों रुपये का व्यवसाय बाधित हुआ. बंदी के दौरान व्यवसायियों ने आसनसोल नगर निगम कार्यालय के समक्ष महाधरना दिया. शामिल व्यवसायी हाथों में काली पट्टी बांधे हुए थे. बाद में उनका शिष्टमंडल मेयर जितेन्द्र तिवारी से मिला तथा उन्हें अपनी मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा. कोयलांचल के सभी सक्रिय व्यवसायिक संगठनों ने इस बंदी को सक्रिय समर्थन किया.
सरकारी स्तर पर जनविरोधी निर्णय
फॉस्बेक्की के महासचिव सुब्रत दत्ता व कार्यकारी अध्यक्ष आरपी खेतान ने कहा कि लगातार आग्रह के बाद भी राज्य सरकार ने जब इस शुल्क से दक्षिण बंगाल को अलग नहीं किया तो व्यवसायियों को संघर्ष का रास्ता अख्तियार करना पड़ा. कोयलांचल में सक्रिय सभी व्यवसायिक संगठनों ने बंदी को सक्रिय समर्थन दिया. इस कारण सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान पूर्ण रुप से बंद रहे. करोड़ों रुपये का व्यवसाय बाधित हुआ. इसके बाद सभी व्यवसायी नगर निगम कार्यालय के समक्ष आयोजित महाधरना में शामिल हुए. धरना की अध्यक्षता श्री खेतान ने की.
श्री खेतान ने कहा कि इस एक्ट के लागू होने से अनावश्यक रूप से कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ेगी. इसके प्रभावी होने से पहले से लागू टैक्स में दो फीसदी तक की वृद्धि होगी. जिसका बोझ आम आदमी की जेब पर ही पड़ना है. मार्केटिंग टैक्स एक्ट 1972 में ही बना इसे 44 सालों तक बंगाल में लागू नहीं किया गया. इसे लागू करने को लेकर व्यवसायियों को नोटिस भेजा जा रहा है. कोलकाता नगर निगम में यह एक्ट प्रभावी नहीं है. झारखंड और बिहार में भी यह एक्ट लागू नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे कोयलांचल का व्यवसाय पूरी तरह से बर्बाद हो जायेगा.
देशव्यापी आंदोलन की संभावना
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के वेस्ट बंगाल चेप्टर अध्यक्ष हकीकत राज कपूर और महासचिव मधुसुदन दरीपा ने कहा कि राज्य में पहले से उद्योग की स्थिति सोचनीय है.
राज्य से व्यवसायियों का पलायन हो रहा है. 60 प्रतिशत टैक्स व्यवसायी देते हैं. इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन किया जायेगा. 1972 के कानून को जब इतने सालों तक लागू करने की क्या अनिवार्यता है? बंगाल में तीस किसान मंडियां हैं. सभी बंद पड़ी हैं. राज्य सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए. नियमत: मंडी में बैंक, लोन, एटीएम, सुरक्षा, मेडिकल की व्यवस्था होनी चाहिए पर नहीं है. कोलकाता में यह एक्ट प्रभावी नहीं है.
इन चेंबरों ने की भागीदारी
महाधरना में आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स, नियामतपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स, बराकर चेंबर ऑफ कॉमर्स, रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स, जामुड़िया चेंबर ऑफ कॉमर्स, उखड़ा चेंबर ऑफ कॉमर्स, पांडेश्वर चेंबर ऑफ कॉमर्स, दुर्गापुर चेंबर ऑफ कॉमर्स, बेनाचिती चेंबर ऑफ कॉमर्स, मिदनापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स, कोलफिल्ड टीम्बर एंड साव मिल ऑनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हुए. नियामतपुर चेंबर व चेंबर के प्रतिनिधि शताब्दी पार्क से रैली के रूप में धरना स्थल पहुंचे.
एक सप्ताह में होगी बैठक
मेयर श्री तिवारी ने कहा कि वे इस मुद्दे पर राज्य सरकार से बात करेंगे. इसके लिए वक्त देना होगा. मुख्यमंत्री के पास तथ्यों को सही ढंग से रखा जायेगा. पंद्रह दिनों के अंदर रवींद्र भवन में सभी चेंबर प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जायेगी. सीएम धरना पर विश्वास नहीं करती, वो सही पहल करेंगी. श्री खेतान ने आग्रह पर उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में बैठक की जायेगी. इसके पहले शिष्टमंडल ने उन्हें मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. पहले उनके कक्ष में वार्ता हुयी. बाद में श्री तिवारी ने महाधरना को भी संबोधित किया.
