नगर निगम प्रशासन के स्तर से हो रहा इसके डीपीआर का निर्माण
शहर की सांस्कृतिक विरासत व पहचान दिखेगी पहली झलक में
आसनसोल : राजनीतिक, सांस्कृतिक व वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र व बीएनआर में स्थित रवींद्र भवन के जीर्णोद्धार के लिए आसनसोल नगर निगम ने तीन करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. इसके लिए विशेषज्ञ एजेंसी से विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है. मेयर जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार से मंजूरी मिलने व फंड उपलब्ध होते ही इसे नया लुक दिया जायेगा.
जानकार सूत्रों ने बताया कि निर्माण के बाद से ही रवींद्र भवन का नवीनीकरण नहीं किया गया है. इसके कारण इसका भवन काफी कमजोर व जजर्र हो गया है. शहर के बीचोबीच होने के कारण शहर की सांस्कृतिक, राजनीतिक व व्यवसायिक गतिविधियों का यह केंद्र रहता है.
यह शहर की सांस्कृतिक पहचान भीहै. यही कारण है कि नगर निगम प्रशासन ने इसे नया आउटलुक देने का निर्णय लिया है. इसके पहले लोक निर्माण विभाग के स्तर से इसके पुनर्निर्माण की पहल शुरू की गयी थी. लेकिन फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण यह योजना पेंडिंग हो गयी थी. लेकिन आसनसोल नगर निगम प्रशासन ने इसे अपने स्तर से पूरा करने का निर्णय लिया है. इस संबंध में राज्य मुख्यालय से भी सहमति ले ली गयी है.
सनद रहे कि इस भवन का संचालन नगर निगम के स्तर से ही होता है. इसकी बुकिंग भी नगर निगम कार्यालय से की जाती है. कर्मियों ने कहा कि भवन वातानुकूलित है. लेकिन तकनीक पुरानी होने के कारण बिजली का खर्च अधिक आता है. इसके साथ ही मंच में भी कई तकनीकी परेशानियां शुरू हो गयी है. इसके कारण सांस्कृतिक आयोजन खासकर नाटक मंचन में काफी परेशानी होती है. हॉल की अधिसंख्य कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त व कमजोर हो गयी हैं.
भवन की छत व फॉल्स सीलिंग भी कमजोर हो गयी है. इसके कारण परेशानी होती है. बरसात के दिनों में रिसाव की आशंका रहती है. मेयर श्री तिवारी ने कहा कि नगर निगम प्रशासन ने इसके जीर्णोद्धार की योजना को मंजूरी दे दी है. डीपीआर का निर्माण अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि नयी योजना में रवींद्र भवन को पूरी तरह से वातानुकूलित किया जायेगा. इससे बिजली खर्च में काफी कमी आयेगी. इसके लिए प्लांट भवन के पश्चिमी हिस्से में लगाया जायेगा. बुकिंग के समय हॉल को गैर एसी भी किया जा सकेगा. मंच को पूरी तरह से बदला जायेगा तथा उसे थीम आधारित बनाया जायेगा.
उन्होंने कहा कि हॉल की सभी कुर्सियां पूरी तरह से बदल दी जायेगी तथा दीवारों के इनर डिजाइन को भी बदला जायेगा. छत व फॉल्स सीलिंग का काम नये सिरे से किया जायेगा. उन्होंने कहा कि रवींद्र भवन का चारदीवारी का भी सौंदर्यीकरण नये तरीके से किया जायेगा तथा उत्तरी हिस्से में खाली पड़ी जमीन में मंच का निर्माण कर उसे अधिक उपयोगी बनाया जायेगा. कोशिश यह है कि इस भवन से शहर की सांस्कृतिक विरासत व पहचान परिलक्षित हो.
