सत्तासीन तृणमूल के विधायकों, नेताओं से लगायी गयी गुहार
समाज के मालिकाना दावे को खारिज किया मंदिर कमेटी ने
रानीगंज. मेजिया श्मशान घाट में स्थित रानीगंज मारवाड़ी समाज का श्मशान भूमि की रक्षा के लिये रानीगंज मारवाड़ी समाज लगातार सत्ताशीन तृणमूल के विधायकों व मेयर जितेंद्र तिवारी से गुहार लगा रहा है. उन्होंने कहा कि रानीगंज पंचायत समिति के स्तर से बन रहे मंदिर के कारण उनकी जमीन अतिक्रमित हो गयी है. इस जमीन को बचाने के लिए समाज हर पहल करने को तैयार है.
मेयर श्री तिवारी से मिले शिष्टमंडल में श्री सीताराम जी भवन इस्टेट के सचिव रमेश झुनझुनवाला व आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद खेतान मुख्य रूप से शामिल थे.
श्री झुनझुनवाला ने बताया कि वर्ष 1927 में माइंस बोर्ड ऑफ हेल्थ विभाग ने रानीगंज मारवाड़ी समाज को शव दाह के लिए जमीन आवंटित की थी. मेजिया श्मशान काली मंदिर के पीछे के हिस्से में वर्षो से मारवाड़ी समाज शवों का दाह संस्कार करता आ रहा है. कुछ वर्ष पहले उक्त स्थल का सौंदर्यीकरण भी समाज ने किया था. सौंदर्यीकरण में आर्थिक सहयोग करनेवालों के नाम का शिलापट्ट भी काली मंदिर के पिछले हिस्से में लगायी गयी थी. पीछे के हिस्से में बने चबूतरे पर शव जलाने के दौरान समाज के सदस्य बैठा करते थे.
उन्होंने कहा कि उक्त काली मंदिर के जीर्णोहार का कार्य मेजिया श्मशान काली मंदिर कमेटी ने किया.इस दौरान छज्जे को दो भाग बिना कोई सूचना के तोड़ दिया गया. समाज के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में विधायक तापस बनर्जी से मुलाकात की. उन्होंने बल्लभपुर पंचायत प्रधान श्रीदास मंडल के पास इसका समाधान करने के लिए भेजा. बीते 23 नवंबर को बल्लभपुर पंचायत कार्यालय में त्रिपक्षीय बैठक की गयी. इसमें सहमति बनी कि काली मंदिर के निर्माण के बाद मंदिर के चारों ओर बननेवाले सीढ़ी के पिछले हिस्से पर मारवाड़ी समाज के लोग शव जलाने के दौरान बैठेंगे. मंदिर के पिछली दीवार पर नामों का शिलापट्ट पूर्ववत लगाया जायेगा. मंदिर निर्माण का नक्शा समाज को भी उपलब्ध कराया जायेगा. समझौता की एक प्रति भी मारवाड़ी समाज को दी जायेगी. पर मंदिर कमेटी ने समझौते की प्रति समाज को न देते हुए बाकी बचे चार छज्जों को भी तोड़ डाला.
मंदिर कमेटी के इस अनैतिक कार्य को देखते हुए समाज के प्रतिनिधियों ने विधायक श्री बनर्जी तथा स्थानीय विधायक सोहराब अली, पंचायत प्रधान श्री दास मंडल, रानीगंज पंचायत समिति के अध्यक्ष डॉ सेनापति मंडल के पास गुहार लगायी. किसी भी स्तर से कोई पहल न होने पर मेयर श्री तिवारी के पास लेकर गये. उन्होंने सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया. उन्होंने इस मुद्दे पर महकमाशासक के साथ बैठक आयोजित करने पर सहमति जतायी.
मंदिर निर्माण कमेटी के सचिव निरंजन गोराई तथा एगरा पंचायत के उपप्रधान सह मंदिर निर्माण कमेटी के सदस्य अशोक हेला ने बताया कि काली मंदिर दो सौ वर्ष प्राचीन होने के कारण जजर्र हो गया था.
चालीस लाख रुपयों की लागत से मंदिर निर्माण हो रहा है. माइंस बोर्ड ऑफ हेल्थ विभाग ने मारवाड़ी समाज को जमीन आवंटित नहीं की थी, बल्कि शव का दाह संस्कार करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया था. मंदिर कमेटी मारवाड़ी समाज के लिए श्मशान की व्यवस्था दूसरे स्थान पर करेगी. जो दाता पांच हजार से अधिक रूपये का दान करेंगे, उनका नाम मंदिर के शिलापट्ट में दर्ज होगा.
