पुस्तक मेले में नहीं हो पायी स्टूडेंट्स की अपेक्षित भागीदारी

आसनसोल : स्थानीय पोलो ग्राउंड में चल रहे आसनसोल पुस्तक मेले में राजनीतिक कारणों से स्टूडेंट्सों की बड़े पैमाने पर भागीदारी नहीं हो सकी. आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर माध्यमिक व उच्च माध्यमिक की परीक्षा फरवरी माह में हो रही है. परीक्षा की तैयारियों में व्यस्तता के कारण स्टूडेंट्स इस माहौल का आनंद नहीं […]

आसनसोल : स्थानीय पोलो ग्राउंड में चल रहे आसनसोल पुस्तक मेले में राजनीतिक कारणों से स्टूडेंट्सों की बड़े पैमाने पर भागीदारी नहीं हो सकी. आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर माध्यमिक व उच्च माध्यमिक की परीक्षा फरवरी माह में हो रही है. परीक्षा की तैयारियों में व्यस्तता के कारण स्टूडेंट्स इस माहौल का आनंद नहीं उठा पाये.
दर्जनों स्टूडेंट्सों ने बताया कि आमतौर पर पुस्तक मेला जनवरी माह में ही आयोजित होता है.लेकिन पहले माध्यमिक व उच्च माध्यमिक परीक्षा फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होती थी. इस वर्ष राज्य विधानसभा का चुनाव होना है. मई माह के पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी. संभवत: मार्च या अप्रैल में चुनाव कराये जा सकत ेहैं. इसे देखते हुए राज्य शिक्षा विभाग ने निर्धारित समय से पहल ेही माध्यमिक व उच्च माध्यमिक परीक्षा कराने का निर्णय ले लिया है. प्रेटिकल परीक्षाएं जनवरी से ही शुरू हो गयी है.
जबकि माध्यमिक परीक्षा एक ेस 14 फरवरी तक तथा उच्च माध्यमिक की परीक्षा 15 फरवरी से 29 फरवरी तक होनी है.अधिसंख्य परीक्षार्थी इसकी तैयारी में व्यस्त होने के कारण पुस्तक मेले के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं. इसके साथ ही अन्य कक्षाओं में पुनर्नामांकन का दौर चल रहा है. इस कारण भी स्कूली छात्र मेले में नहीं आ पा रहे हैं. कॉलेज के स्टूडेंट्सों की शिकायत हैं कि उनके लिए पुस्तक स्टॉलों में पुस्तक ही उपलब्ध नहीं है.
मेले आयोजन के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी मेले में पुस्तक प्रेमियों की भीड़ अपेक्षा के अनुरूप नहीं आयी है. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में पुस्तक प्रेमियों की संख्या अधिक रही. जानकार पुस्तक मेले का आयोजन स्थल बदले जाने को इसका मुख्य कारण बता रहे है.
कमेटी सूत्रों के अनुसार शुक्रवार की रात्रि तक 34 हजार पुस्तक प्रेमियों ने मेले का भ्रमण किया था. सर्वाधिक भीर बीते रविवार को थी. उस दिन 7,400 पुस्तक प्रेमी मेले में आये थे. अंतिम दो दिन शनिवार व रविवार हैं. कमेटी को यकीं है कि शनिवार व रविवार को 15 हजार से अधिक पुस्तक प्रेमी मेले में आयेंगे तथा कुल संख्या 50 हजार से अधिक हो जायेगी.
आसन ने दिखायी नारी सुरक्षा पर डॉक्यूमेंटरी फिल्म
पुस्तक मेले में आसनसोल माइ होम टाउन, आसन (फेसबुक ग्रुप) के सदस्यों ने शनिवार को अड्डा जमाया. दो दर्जन से अधिक सदस्यों की मौजूदगी रही. इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे आशीष सरकार, इंन्द्रजीत घोष, अमित दास, स्नेहा चक्रवर्ती व शुभ्रा सरकार आदि ने बताया कि पहले उनका संगठन आसनसोल माइ होम टाउन ‘द नेटर ’ के नाम से सक्रिय था.
बाद में इसका नाम बदल कर आसन को दिया गया. आसनसोल शहर के नाम के पीछे आसन व सोल पेड़ों की मौजूदगी को मुख्य कारण माना जाता रहा है. लेकिन शहर में आसन प्रजाति के पेड़ गिनती के रह गये हैं. इस कारण इस प्राचीनता को केंद्र में रखने के लिए नामाकरण किया गया. उन्होंने कहा कि सभी सदस्य फेसबुक के माध्यम से जुड़े हैं.
उनकी सदस्यता बढ़ती जा रही है. वे विभिन्न मुद्दों पर पूरे वर्ष सक्रिय रहते हैं. विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाते हैं. ट्रॉफिक जागरूकता, क्लीन आसनसोल-ग्रीन आसनसोल, सड़क सुरक्षा जागरूकता, सफाई जागरूकता आदि अभियान चलाय ेजाते हैं. पुस्तक मेला को व्यापक प्लेटफॉर्म मानत ेहुए इसके मैदान में शनिवार को बैठक करने का निर्णय लिया गया. बैठक में सदस्यों व पुस्तक प्रेमियों को पूरे वर्ष चलायी गयी गतिविधियों की जानकारी दी गयी. इसके साथ ही प्रोजेक्टर के माध्यम से महिला सुरक्षा को केंद्र कर बनाये गये दस मिनट की डोक्यूमेंट्ररी का भी प्रदर्शन किया गया. उन्होने कहा कि इस समय नीरा उत्पीड़न की घटनाएं सबसे अधिक हो रही है. इस मुद्दे पर सचेतनता काफी जरूरी है.
आगामी रणनीति तय की ‘ई-मोशन’ सदस्यों ने
पुस्तक मेले के मैदान में फेसबुक ग्रुप ‘ई-मोशन’ के सदस्यों ने भी बैठक की तथा शहर के सौंदर्यीकरण व समाज सेवा के क्षेत्र में नयी गतिविधियों की रणनीति बनायी. संस्था से जुड़े अरखा मंडल, अभिक सेनगुप्ता प्रियंका दत्ता, उपेन्द्र चौबे, शुभजीत राय व विकास मंडल ने कहा कि उनकी संस्था से अधिसंख्य स्टूडेंट्स, नौकरीपेशा व व्यवसायी जुड़े हुए है.
संस्था फेसबुक के माध्यम से सदस्यों को जोड़ने का कार्य करती है. पूरे वर्ष संस्था कोई न कोई अभियान चलाती ही रहती है. उन्होंने कहा कि शर के सौंदर्यीकरण की दिशा में उनकी अपनी पहल होती है. बिना किसी सरकारी या व्यवसायिक सहायता के वे अपने स्तर से विभिन्न प्रतिमाओं, स्थलों का सपआई व रंगाई करते हैं. इसके लिए पेशेवर मजदूर नहीं लगाये जाते. सदस्य खुद ही यह कार्य करते हैं. इसके साथ ही वृद्धाश्रम, अनाथालय आदि में रहनेवालों के सहायतार्थ पहल की जाती है. जाड़े में और पर्व त्योहारों में जरूरतमंदों के बीच गर्म व नये कपड़ों का वितरण किया जाता है. इस मद में आनेवाले खर्च सभी अपने स्तर से जुटाते हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले माह उन्होंने बर्नपुर बारी मैदान अपने किस्म की पहली पहल की. जरूरतमंदों के लिए दुकान लगायी गयी तथा उन्हें अपने पसंद का कपड़ा नि:शुल्क चुनने का मौका दिया गया. पहली बार मदद लेनेवाले को पसंद की चीजें मिली. उन्होंने कहा कि बैठक के माध्यम से पुस्तक मेले का आनंद तथा नये कार्यक्रम की रूप रेखा भी बन गयी.

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