गतिरोध : आसनसोल नगर निगम चुनाव के पूर्व घोषित कार्यक्रम को राज्य चुनाव आयोग का मिला झटका
तैयारी में जुटी राजनीतिक पार्टियों की बढ़ी परेशानी
आदेश न आने से प्रशासनिक अधिकारी दुविधा में
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम चुनाव को लेकर तीन सितंबर को जारी होनेवाली चुनावी अधिसूचना गुरुवार को जारी नहीं हो सकी. महकमाशासक अमिताभ दास ने कहा कि इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग के स्तर से कोई सूचना जारी नहीं की गयी है.
हालांकि आगामी नौ सितंबर को अधिसूचना जारी होने की संभावना जतायी जा रही है. इधर अधिसूचना जारी न होने से तीन अक्तूबर को होनेवाले मतदान को लेकर भी अटकलें तेज हो गयी हैं. विपक्षियों का आरोप है कि किसी न किसी बहाने इस चुनाव को भी स्थगित करने की कोशिश की जा सकती है.
पहले जारी हुआ था कार्यक्रम
सनद रहे कि कुछ दिन पहले राज्य चुनाव आयोग ने नगर निगम चुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा कर दी थी. इसके तहत तीन सितंबर को चुनावी अधिसूचना जारी होनी थी. इस तिथि से नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू होनी थी.
दस सितंबर तक नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित थी. 11 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होनी थी तथा 12 सितंबर तक नाम वापसी की तिथि तय थी. इसके बाद तीन अक्तूबर को मतदान, पुनर्मतदान की स्थिति आने पर पांच अक्तूबर को पुनर्मतदान तथा सात अक्तूबर को मतगणना होनी थी.
इसी कार्यक्रम को सामने रख कर प्रशासनिक अधिकारी व राजनीतिक दल अपनी गतिविधियां जारी रखी हुई थी. तीन सितंबर से नामांकन होने की संभावना को देखते हुए ही महकमाशासक श्री दास ने सर्वदलीय बैठक कर सभी नेताओं को सूचित कर दिया था कि कुल 106 वार्डो के लिए दो स्कूलों से नामांकन फॉर्म निर्गत करने तथा नामांकन पत्र जमा करने की प्रक्रिया पूरी की जायेगी. पूरे क्षेत्र के निवासियों व राजनीतिक दलों को इससे संबंधित अधिसूचना जारी होने की संभावना थी.
निराश लौटे वामपंथी नेता, की आलोचना
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत वामफ्रंट का प्रतिनिधि दल महकमा शासक श्री दास से मुलाकात कर नामांकन पत्र लेने पहुंचा. महकमाशासक श्री दास ने अधिसूचना जारी न होने की सूचना दी.
नामांकन प्रक्रिया नहीं होने की जानकारी मिलने पर वामफ्रंट के नेताओं ने राज्य सरकार की क ड़ी आलोचना की. इस दौरान माकपा नेता सह पूर्व सांसद वंशगोपाल चौधरी, पार्थो मुखर्जी, प्रदीप मंडल, पूर्व मेयर तापस राय, पूर्व पार्षद वशीमूल हक, सीपीआइ व पूर्व उपमेयर विनोद सिंह, मानिक मालाकार आदि मौजूद थे. राज्य सरकार की आलोचना करते हुए पूर्व सांसद श्री चौधरी ने बताया कि नौ सिंतबर से नामांकन प्रक्रिया की मौखिक जानकारी दी गयी.
इसके लिये प्रशासन द्वारा पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया. दो दिन पहले ही चुनाव के लिये सर्वदलीय बैठक कर चुनाव प्रक्रिया की जानकारी दी गयी थी. राज्य सरकार दो घंटे पहले लिये निर्णय को कभी भी बदल सकती है.
सरकार चुनाव कराने से डरकर इसे बार-बार टालने का प्रयास कर रही है.राज्य सरकार ने जनता के भरोसा को तोड़ दिया है. सरकार बाली नगरपालिका के साथ ही आसनसोल नगर निगम चा चुनाव कराना चाहती है. उन्होंने कहा कि नामांकन प्रक्रिया के लिये चयन किये गये दो स्कूलों आसनसोल मनिमाला गल्र्स हाइ स्कूल तथा उपेंद्रनाथ हाइ स्कूल में बेवजह छुट्टी रही.
महकमा शासक को भी आधिकारिक सूचना नहीं
महकमाशासक श्री दास ने कहा कि आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कोई सूचना राज्य चुनाव आयोग के स्तर से उन्हें नहीं दी गयी है. अधिसूचना के स्थगन या नयी तिथि की भी जानकारी नहीं दी गयी है.
अतएव चुनाव प्रक्रिया गुरुवार से शुरू नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि नये कार्यक्रम के बारे में भी उन्हें कोई सूचना नहीं है. इधर सूत्रों ने बताया कि आसनसोल नगर निगम के साथ-साथ राजारहाट नगर निगम के चुनाव एक साथ तीन अक्तूबर को होना तय है.
लेकिन राजारहाट नगर निगम में बाली नगरपालिका के कुछ वार्डो के विलय को लेकर कलकत्ता हाइ कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है. संभवत: आठ सितंबर को उस पर सुनवाई होनेवाली है. राज्य चुनाव आयोग उक्त तिथि पर हाइ कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहा है.
इस निर्णय के आधार पर ही कोई निर्णय लिया जायेगा. इस स्थिति में आगामी नौ सितंबर को चुनावी अधिसूचना जारी हो सकती है. हालांकि एक सूत्र ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति का आकलन करने मं अतिरिक्त समय भी ले सकती है. इस स्थिति में आगामी 12 सितंबर को भी चुनावी अधिसूचना जारी हो सकती है.
चुनाव स्थगन को लेकर अटकलें तेज
चुनावी अधिसूचना जारी न होने के बाद चुनाव स्थगन की अटकलें तेज हो गयीं. अधिसंख्य विपक्षी नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार किसी न किसी बहाने चुनाव टालने की कोशिश कर रही है.
इसके पीछे उसकी राजनीतिक हार का डर है. कुछ का कहना था कि राज्य सरकार इस चुनाव को छठ के बाद कराना चाहती है तो कुछ का कहना था कि राज्य विधानसभा चुनाव के साथ ही नगर निगम का चुनाव होगा.तृणमूल नेताओं ने दावा किया कि भले ही चुनावी अधिसूचना विलंब से जारी होगी, लेकिन मतदान तीन अक्तूबर को ही होगी.
क्योंकि राज्य सरकार व राज्य चुनाव आयोग ने यह तिथि निर्धारित कर सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है तथा बिना ठोस कारण दिये तिथि बदलाव करना आसान नहीं होगा. उनका दावा है कि नामांकन तिथि की अवधि में कटौती की जा सकती है.
