नयी तकनीक का होगा इस्तेमाल

आसनसोल : काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाया जा रहा है. इसके लिए आने वाले सत्र में बदलाव किये जा रहे हैं. पिछले सत्र यानी 2014 से बोर्ड परीक्षा में ओएमआर के जरिये परीक्षा हो रही थी. लेकिन इसे लागू करने के बाद कॉपी की जांच करने में काफी मशक्कत […]

आसनसोल : काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाया जा रहा है. इसके लिए आने वाले सत्र में बदलाव किये जा रहे हैं. पिछले सत्र यानी 2014 से बोर्ड परीक्षा में ओएमआर के जरिये परीक्षा हो रही थी. लेकिन इसे लागू करने के बाद कॉपी की जांच करने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा था. वीक्षक को काफी समय लगा था, लेकिन इस साल से इसे बंद कर दिया जायेगा. 2016 की बोर्ड परीक्षा में ओएमआर शीट से परीक्षा नहीं होगी. लेकिन बोर्ड की ओर से एक नयी तकनीक का इस्तेमाल परीक्षा में होगा.
बोर्ड के सचिव जेरी अराथुन ने बताया कि इस बार से पहली बार एलआइसीआर सॉल्यूशन सिस्टम का इस्तेमाल परीक्षा में होगा. इसके जरिये परीक्षा के बाद परीक्षार्थी कॉपी जमा कर देंगे.
जब उनके कॉपी की जांच होगी तो जांच करने वाले शिक्षक को एक स्पेशल पेन और टैब दिया जायेगा. इस पेन की इंक साधारण पेन से अलग होगी. परीक्षार्थियों की कॉपी की जांच भले साधारण पेन से हो जायेगी, लेकिन जब हर सवाल के जवाब के सामने अंक दिया जायेगा तो उसी पेन से दिया जायेगा. अंक के टोटल को भी उसी पेन से लिखा जायेगा.
इसके बाद टैब से इसकी फोटो लेकर उसे तत्काल सेंड कर दिया जायेगा. उक्त कॉपी की फोटो क्लाउड कंप्यूटिंग के जरिये बोर्ड के सर्वर में सेव हो जायेगी और बोर्ड के पास एक-एक परीक्षार्थी के अंक मिल जायेंगे और अंक मिलने का तरीका आसान होगा. इस तकनीक के जरिये अगर परीक्षा के बाद कोई परीक्षार्थी अपने अंक से संतुष्ट नहीं है और वह री-चेक कराता है तो कम समय में उसी सारी डीटेल हासिल हो सकेगी. देश में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसे अगले सत्र से लागू किया जायेगा.
आर्ट्स में मैथ भी ले सकेंगे विद्यार्थी
जेरी अराथुन से बताया कि बोर्ड की ओर से इस तरह का सिलेबस डिजाइन किया गया है कि जरूरी नहीं कि साइंस के स्टूडेंट को मैथ, फिजिक्स, कैमिस्ट्री पढ़ना अनिवार्य है.
अगर कोई विद्यार्थी मैथ नहीं पढ़ना चाहता है तो वह फिजिक्स, कैमिेस्ट्री के साथ अपनी रुचि के आर्ट्स या फिर कॉमर्स के विषय की पढ़ाई भी कर सकता हैं. सिर्फ इंग्लिश रहना अनिवार्य है. इसके बाद सभी बंधनों को हटाया जा रहा है. बोर्ड की ओर से विद्यार्थियों के ऊपर दबाव को कम करने के लिए इस तरह के फैसले लिये गये हैं.
कई विषयों के अंकों का होगा बदलाव
बोर्ड के सचिव ने कहा कि अब तक कंप्यूटर साइंस, फिजिकल एजुकेशन, फैशन डिजाइनिंग और म्यूजिक में 50 अंक के थ्योरी और 50 अंक प्रैक्टिकल के होते थे, लेकिन सत्र 2016 इसमें बदलाव किया जायेगा. अब थ्योरी के 70 अंक तथा प्रैक्टिकल के 30 अंक दिये जायेंगे. इसके साथ ही दसवीं में 80 फीसदी मार्क्‍स थ्योरी तथा 20 मार्क्‍स प्रोजेक्ट के जरिये मिलेंगे. बारहवीं कक्षा में 70 फीसदी मार्क्‍स थ्योरी के तथा 30 फीसदी मार्क्‍स प्रैक्टिकल मिलेंगे.

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