इस माह में शिव की पूजा होती है विशेष फलदायक
धरती पर रु द्र रूप में वास करते हैं कैलाशपति शिव
आसनसोल : साल का सबसे पवित्र माह सावन की पहली सोमवारी पर कोयलांचल के विभिन्न शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. इनमें महिला श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी.
समीपवर्त्ती नदी से पवित्र जल लेकर श्रद्धालुओं व कांवरियों ने जलाभिषेक किया. विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा की गयी. मंदिर परिसर से लेकर मंदिरों तक पहुंचनेवाली सड़कों पर ‘बोल बम-बोल बम’ के नारे गूंजते रहे.
सोमवारी की तैयारी कोयलांचल के मंदिरों व शिवालयों में उमंग के साथ की गयी थी. शिव मंदिरों में हर वर्ष जुटने वाली भीड़ को देखते हुए कमेटियों ने अलग व्यवस्था की है. मंदिरों में सुबह चार बजे से ही ‘बम-बम भोले, बोल बम’ के नारे लगने शुरू हो गये. मंदिरों के आस-पास पूजन सामग्री बिक्री की दुकानें भी सज गयी हैं. सावन में पार्वती और पीपल पेड़ की पूजा करने से शिव प्रसन्न होते हैं.
ऐसी मान्यता है कि सावन में भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं. इस कारण जगत के पालन का दायित्व शिव पर चला आता है. इस कारण इस माह में शिव की पूजा विशेष फलदायक माना जाता है.
एक मान्यता यह भी है कि भगवान शिव सावन में धरती पर रु द्र रूप में वास करते हैं. इस दौरान जिस पर खुश हो जाते हैं, उसकी मनोकामना पूरी कर देते हैं. सागर मंथन में निकले विष धारण करने के बाद शिव बेहोश हो गये थे. देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया था. इस माह में कांवड़ चढ़ाना पुण्यदायक माना जाता है.
