आंकड़ों की जुबानी : आत्महत्या के मामले में आसनसोल टॉप थ्री पर
आसनसोल : विकास के मामले में देश के सौ शहरों में टॉप टेन में शामिल आसनसोल आत्महत्या के मामले में भी अग्रणी मोर्चे पर है. नेशनल क्राइम रिकॉर्डस ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार बीते वर्ष 2014 में आसनसोल में कुल 388 व्यक्तियों ने आत्महत्या की. हालांकि वर्ष 2013 की तुलना में 52.6 फीसदी की कमी आयी है. उस वर्ष शहर में 819 व्यक्तियों ने आत्महत्या की थी.
एनसीआरबी के आंक ड़ों के अनुसार आसनसोल शहर की आबादी 12.40 लाख है. पिछले वर्ष कुल 388 व्यक्तियों ने आत्महत्या की है. प्रति एक लाख की आबादी पर यह आंक ड़ा 31.3 होता है. प्रति लाख आबादी पर आत्महत्या करनेवालों की संख्या के आलोक में देखे तो आसनसोल देश में तीसरे स्थान पर है. देश में पहले स्थान पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल है.
यहां प्रति लाख आबादी में आत्महत्या कराने वालों की संख्या 56.6 है. दूसरे स्थान पर केरल राज्य का ऐतिहासिक व समुद्री तट पर बसा शहर कोल्लम है. यहां पिछले वर्ष प्रति लाख आबादी पर 40.3 लोगों ने आत्महत्या की. हालांकि यह आंक ड़ा राहत देनेवाला है. वर्ष 2013 में आसनसोल शहर में 819 व्यक्तियों ने आत्महत्या की थी. वर्ष 2013 की तुलना में वर्ष 2014 में आत्महत्या में 52.6 फीसदी की ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गयी है.
इस मामले में आसनसोल का स्थान पूरे देश में चौथे स्थान पर है. इस मामले में सबसे अधिक उत्साहबर्धक आंक ड़ेउत्तर प्रदेश के तीन शहरों के हैं. 78.7 फीसदी की कमी कानपुर शहर में दर्ज की गयी है.
वर्ष 2013 में वहां 648 व्यक्तियों ने आत्महत्या की थी. जबकि वर्ष 2014 में मात्र 138 व्यक्तियों ने आत्महत्या की. दूसरे स्थान पर इलाहाबाद रहा, जिसने वर्ष 2013 की तुलना में 64.3 फीसदी निगेटिव ग्रोथ दर्ज किया है. तीसरे स्थान पर मेरठ शहर है, जहां वर्ष 2013 की तुलना में 53.2 फीसदी का निगेटिव ग्रोथ है.
संपन्न नागरिक नहीं करते आत्महत्या
आमतौर पर माना जाता है कि अधिक धन या संपत्ति होने पर मानसिक तनाव बढ़ता है. मानसिक तनाव के कारण ही आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती है. लेकिन वर्ष 2014 में देश में आत्महत्या करनेवालों की संख्या इसकी उलट कहानी कहती दिखती है.
आत्महत्या करनेवाले 1.33 लाख लोगों में से 69.7 फीसदी लोगों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम थी. जबकि 26.9 फीसदी लोगों की वार्षिक आय एक लाख से पांच लाख रुपये के बीच थी.
निम्न व निम्न मध्यम तबके के लोगों ने अधिक आत्महत्या की. संपन्न तबके के लोगों में आत्महत्या करनेवालों की संख्या मात्र 3.4 फीसदी ही है.
ज्यादातर लोग फांसी लगा कर करते हैं आत्महत्या
एनसीआरबी के आंक ड़ों के अनुसार आत्महत्या करने के कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. वर्ष 2014 में फांसी लगाकर आत्महत्या करनेवालों की संख्या सबसे अधिक रही. क्योंकि यह अपेक्षाकृत आसान होता है. इस वर्ष 41.8 फीसदी लोगों ने फांसी लगा कर, 26 फीसदी लोगों ने विषपान कर आत्महत्या की. मात्र 6.9 फीसदी लोगों ने आत्मदाह किया. 5.6 फीसदी लोगों ने पानी में डूब कर आत्महत्या की थी.
बंगाल को एक पायदान की बढ़त
इस मामले में पश्चिम बंगाल की स्थिति भी काफी खराब है. सर्वाधिक आत्महत्या करनेवाले देश के राज्यों में इसका स्थान तीसरे नंबर पर है. हालांकि वर्ष 2013 में यह देश में चौथे स्थान पर था.
वर्ष 2014 में कुल 14,310 व्यक्तियों ने राज्य में आत्महत्या की. यह देश के आंक ड़े में 10.9 फीसदी है. सबसे पहले स्थान पर महाराष्ट्र है. बीते वर्ष वहां 16,307 व्यक्तियों ने आत्महत्या की. यह पूरे देश के आंक ड़े में 12.4 फीसदी है. जबकि दूसरे स्थान पर तमिलनाडू है. वहां कुल 16,122 व्यक्तियों ने आत्महत्या की है, जोपूरे देश के आंक ड़े का 12.2 फीसदी है. वर्ष 2013 में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी पूरे देश में 9.7 फीसदी थी तथा वह देश में चौथे स्थान पर था. इस मामले में उसने एक पायदान की बढ़त हासिल की है.
महिलाओं से अधिक पुरुष करते हैं आत्महत्या
उम्र के आधार पर गणना करें तो 18 साल से कम उम्र के आत्महत्या करनेवालों में पुरुष व महिला का अनुपात 51: 49 का है. लेकिन 18 वर्ष की उम्र से अधिक में आत्महत्या करनेवालों में पुरुष व महिला का अनुपात 68 : 32 है.
यानी 18 वर्ष की उम्र के बाद महिलाएं अधिक सहनशील व परिपक्व हो जाती है. जबकि पुरुषों में तनाव ङोलने की क्षमता कम होती जाती है. लेकिन इस मामले में हर उम्र में बढ़त पुरुषों के हिस्से में ही रही है. आत्महत्या करनेवाले हर छह व्यक्तियों में एक गृहिणी शामिल होती है. आत्महत्या करनेवाले 67 फीसदी पुरुष विवाहित थे , जबकि आत्महत्या करनेवाली में 63 फीसदी महिलाएं विवाहिता थी.
