आसनसोल : कोलकर्मियों के 10वें वेतन समझौता के दो साल पूरे हो गये. 10 अक्तूबर, 2017 को दिल्ली में 10वां वेतन समझौता हुआ था. दो साल में कोलकर्मियों को रिटायरमेंट के बाद मिलनेवाली चिकित्सा सुविधा को लेकर किचकिच जारी है. इन दो सालों में कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकेयर स्कीम (सीपीआरएमएस) की मोडलिटी ही तय नहीं हो पा रही है.
सीआइएल के सीपीआरएमएस, संशोधित पर विवाद

सीआइएल के सीपीआरएमएस, संशोधित पर विवाद
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आसनसोल : कोलकर्मियों के 10वें वेतन समझौता के दो साल पूरे हो गये. 10 अक्तूबर, 2017 को दिल्ली में 10वां वेतन समझौता हुआ था. दो साल में कोलकर्मियों को रिटायरमेंट के बाद मिलनेवाली चिकित्��ा सुविधा को लेकर किचकिच जारी है. इन दो सालों में कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकेयर स्कीम (सीपीआरएमएस) की मोडलिटी ही तय नहीं […]
स्कीम की देख-रेख के लिए गठित ट्रस्ट का अभी तक निबंधन नहीं हो सका है. स्कीम को लेकर ताजा विवाद फिर सामने आ गया है. कोल इंडिया के जीएम (एमपीएंडआईआर) अजय कुमार चौधरी के गत चार अक्तूबर को कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकेयर स्कीम (सीपीआरएमएस) संशोधित के संबंध में जारी आदेश सवालों के घेरे में है.
जेबीसीसीआई की बैठक में तय हुआ था कि सीपीआरएमएस 2014 के जो सदस्य हैं, उन्हें संशोधित स्कीम का लाभ मिलता रहेगा. श्री चौधरी के पत्र के मुताबिक संशोधित स्कीम का लाभ लेने के लिए सीपीआरएमएस 2014 के सदस्यों को बाकी पैसा जमा करना होगा. विवाद इसी बात को लेकर है.
सीटू नेता व स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी के सदस्य डीडी रामानंदन ने कमेटी चेयरमैन पीके सिन्हा और कोल इंडिया के कार्मिक निदेशक आरपी श्रीवास्तव को पत्र लिख कर सवाल किया है कि जेबीसीसीआई की फुल बेंच द्वारा लिये गये निर्णय को स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी कैसे बदल सकती है?
जानकारी के मुताबिक कोल इंडिया ने 29 अक्तूबर, 2018 को एक आदेश जारी किया था. जिसके मुताबिक सीपीआरएमएस एनइ 2014 के सदस्यों को सीपीआरएमएस संशोधित का लाभ मिलेगा. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस आदेश के बाद कुछ रिटायर कोलकर्मी सीपीआरएमएस संशोधित के तहत लाभ भी ले चुके हैं.
विवाद है आखिर क्यो?
कोल इंडिया के जीएमपी श्री चौधरी ने चार अक्तूबर को सीपीआरएमएस संशोधित के बारे में एक पत्र जारी किया, जिसके मुताबिक रिटायर कोलकर्मियों के सदस्य बनने की समय सीमा बीते 31 अगस्त से छह माह के लिए बढ़ा दी गई है. संशोधित स्कीम के लिए 40 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है.
सीपीआरएमएस 2014 के जो सदस्य हैं, उन्हें अगर सीपीआरएमएस संशोधित का लाभ लेना है तो अपेक्षित राशि जमा करनी होगी. यानी कोई 20 हजार रुपये जमा कर सदस्य बना है तो उसे 20 हजार रुपये और जमा करने होंगे. नहीं तो संशोधित स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा. जिन्होंने 15 हजार रुपये जमा किये हैं, उन्हें 25 हजार रुपये जमा करने होंगे.
क्या है सीटू नेता के पत्र में
सीटू नेता सह स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी सदस्य डीडी रामानंदन ने कमेटी के चेयरमैन और कोल इंडिया के कार्मिक निदेशक को लिखे पत्र में कहा है कि 31 अगस्त को कमेटी की सातवीं बैठक में उन्होंने इसका विरोध किया था. जिसे मिनट्स से डिलीट कर दिया गया.
10वीं जेबीसीसीआई की चौथी बैठक छह जून, 2017 को दिल्ली में हुई थी. उस बैठक में सीपीआरएमएस के ड्रॉफ्ट पर मुहर लगी थी. स्कीम के ड्रॉफ्ट में लिखा है कि जो सीपीआरएमएस 2014 के सदस्य हैं, उन्हें संशोधित स्कीम का लाभ लगातार मिलता रहेगा. कोल इंडिया ने पत्रांक संख्या 1017 दिनांक 29 अक्तूबर, 2018 को जारी किया.
इस पत्र के आलोक में सीपीआरएमएस 2014 के कुछ सदस्य संशोधित स्कीम का लाभ भी ले चुके हैं. सीटू नेता ने लिखा है कि वे समझते हैं कि स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी इतनी सशक्त नहीं है कि जेबीसीसीआई के निर्णय को बदल सके. इसलिए स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की सातवीं बैठक के मिनट्स से सीपीआरएमएस 2014 के सदस्यों से पैसा लेने की बात डिलीट करें.
2018 के आदेश में क्या है
कोल इंडिया के तत्कालीन जीएमपी डीजे नायक ने 29 अक्तूबर, 2018 को कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक कंपनियों के कार्मिक निदेशकों को पत्र लिखा. पत्र जेबीसीसीआई में पारित सीपीआरएमएस एनइ के लाभ को लागू करने के बारे में है.
इसमें कहा गया है कि पूरे जीवन में रिटायर पति-पत्नी आठ लाख रुपये तक इलाज करा सकते हैं. दोनों में से किसी एक की मौत के बाद शेष राशि का लाभ दूसरे को मिलेगा. दिव्यांग बच्चे को पूरे जीवन में 2.50 लाख रुपये के इलाज की सुविधा मिलेगी.