सांकतोड़िया : समय पूर्व सेवानिवृत्ति करने की तैयारी से कोल अफसरों में नाराजगी व्याप्त है. अफसरों का कहना है कि उच्च प्रबंधन स्वैच्छिक सेवानिवृति योजना लागू करें, ताकि रिटायरमेंट लेने वाले अफसर वीआर भरकर फायदा उठा सकें. इस संबंध में कोयला मंत्री को भी पत्र लिखकर जल्द ही स्कीम लागू करने की मांग की गई है.
वीआर स्कीम बनाने के दो साल पहले कमेटी बनी पर अभी तक योजना नहीं बन सकी. ईसीएल समेत सीआइएल की अन्य अनुषांगिक कंपनी में कार्यरत अफसरों पर छंटनी की तलवार लटक रही है. नई नीति के तहत कई अफसर की सूची तैयार की गई है, पर अभी कार्यमुक्त नहीं किया गया है. कोल अफसर इस नीति का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि अफसरों को नियम विरुद्ध कार्यमुक्त नहीं किया जाना चाहिए.
आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ कोल एग्जीक्यूटिव की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई. बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उच्च प्रबंधन कोल अफसरों के हित में कार्य करें, ताकि अफसर कोयला उत्पादन में अपना अहम योगदान दे सकें. वर्ष 2017-18 में पीआरपी का भुगतान किया गया, पर पिछली अवधि का भुगतान नहीं दिया गया. संघ का मानना है कि कंपनी में अनुभवी अफसरों की कमी बनी है, पर वर्तमान में कार्यरत अफसरों को ही बाहर निकालने का षड्यंत्र किया जा रहा है. प्रबंधन अफसरों को निकालने की बजाए उनके लिए आकर्षक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) लागू करें, ताकि जिन अफसरों को कार्य छोड़ना है, वे वीआर भरकर कार्यमुक्त हो जाएं.
इससे अफसरों के साथ ही कंपनी को भी फायदा होगा. यहां यह बताना लाजिमी होगा कि कंपनी ने वीआर स्कीम तैयार करने वर्ष 2017 में एक समिति का गठन किया था. नौ सदस्यीय समिति में प्रबंधन व ट्रेड यूनियन की ओर से चार-चार प्रतिनिधि व ऑफिसर्स एसोसिएसन की ओर से एक को-ऑर्डिनेटर रखा गया था. बावजूद इसके अभी तक वीआर की स्कीम तैयार नहीं हो सकी. कोल कंपनी में अफसरों के ई-नाइन पद को समाप्त कर दिया गया है. इसके स्थान पर एम-वन व एम-टू पद लागू किया गया है. इ-नाइन पद हटाए जाने से अनेक अफसर पदोन्नति से वंचित हो रहे हैं. अफसरों ने ई-नाइन पद का सृजन पुनः किए जाने का प्रस्ताव रखा है.
