नजरूल इस्लाम के शोध का होगा दो देशों में आदान-प्रदान

आसनसोल : विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के साहित्य एवं उनके जीवन पर चल रहे गवेषणा कार्योँ के आपसी आदान प्रदान एवं पारस्परिक सहयोग के मुद्दे पर बांग्लादेश के इंस्टिच्यूट ऑफ नजरूल स्टडीज एवं आसनसोल के नजरूल सेंटर फॉर स्टडीज के अधिकारियों के बीच गुरूवार को काजी नजरूल यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन में समझौते पत्र […]

आसनसोल : विद्रोही कवि काजी नजरूल इस्लाम के साहित्य एवं उनके जीवन पर चल रहे गवेषणा कार्योँ के आपसी आदान प्रदान एवं पारस्परिक सहयोग के मुद्दे पर बांग्लादेश के इंस्टिच्यूट ऑफ नजरूल स्टडीज एवं आसनसोल के नजरूल सेंटर फॉर स्टडीज के अधिकारियों के बीच गुरूवार को काजी नजरूल यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन में समझौते पत्र पर आधिकारिक हस्ताक्षर किये गये.
केएनयू के कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती एवं जातीय कवि काजी नजरूल इस्लाम यूनिवर्सिटी के कुलपति एएचएम मुस्तफिजार रहमान की उपस्थिति में दोनों यूनिवर्सिटियों के रजिस्ट्रार ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किये. कला के डीन प्रो. मुशर्रत शबनम, बांग्ला के विभागाध्यक्ष प्रो. शहाबुद्दीन, रजिस्ट्रार डॉ हुमायूं कबीर, यूनिवर्सिटी के अधिनस्थ इंस्टिच्यूट ऑफ नजरूल स्टडीज के सहायक निदेशक मोहम्मद रशिदूल अनाम, काजी नजरूल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एसके गुहा, उप रजिस्ट्रार डॉ चैताली दत्ता आदि उपस्थित थी.
कुलपति डॉ चक्रवर्ती ने कहा कि दोनों ही देशों में कवि नजरूल के जीवन, साहित्य एवं रचनाओं पर नियमित रूप से शोध कार्य चल रहे हैं. दोनों सेंटर मिल कर उनके साहित्य, संगीत, एवं रचनाओं एवं शोध निष्कर्षोँ को आपस में आदान प्रदान, संग्रहित व प्रकाशन करेंगे. कवि नजरूल की रचनाओं को संग्रहशाला में संग्रहित एवं इसके लिए वेबसाईट का निर्माण किया जायेगा. नजरूल संगीत के नाम से संगीत प्रेमियों के बीच प्रचलित 4500 गानों में से नजरूल के वास्तविक गानों को लेकर संगीत प्रेमियों के बीच भारी भ्रम है.
उन्होंने कहा कि नजरूल के वास्तविक 2500 गानों को चिंहित किया गया है. दोनों सेंटर एक साथ नजरूल की रचनाओं, कविता संग्रह को प्रचारित प्रसारित करेंगे. प्रचार प्रसार के साथ साथ कवि नजरूल की सामाजिक भावनाओं, समाज प्रेम, राष्ट्र प्रेम की भावना वर्तमान में देश दुनिया व शोध केद्रों पर चल रहे कार्यों की स्थिति का भी आदान प्रदान किया जायेगा. उन्होंने कहा कि नजरूल का जीवन दोनों देशों में व्यतीत होने के कारण नजरूल के साहित्य और जीवन के अंश दोनों ही देशों में हैं.
आसनसोल के केएनयू में कवि नजरूल को लेकर रेगुलेटरी बॉडी का गठन किया जायेगा. केएनयू में नजरूल साहित्य, संस्कृति एवं रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जायेगा. केएनयू के हिंदी के डीन सह हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉ बिजय कुमार भारती को नजरूल के रचनाओं एवं गीतों को हिंदी में अनुवाद करने का दायित्व दिया गया है.
उन्होंने कहा कि देश विदेश के साथ साथ देश के कई शिक्षण संस्थानों से जूडे लोग नजरूल की रचनाओं को लेकर गंभीर हैं. बर्दवान यूनिवर्सिटी की प्रो. सुष्मिता चक्रवर्ती, दार्जिलिंग के प्रो. नजरूल गीतों का अंग्रेजी और नेपाली भाषा में अनुवाद कर रहे हैं. उस्ताद रशीद खान नजरूल के गीतों को गाने के लिए स्वीकृति दी है. नजरूल गीतों को सोशल मीडिया एवं यूट्यूब के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचाया जायेगा.

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