पंचायत चुनाव के लिए लौटने लगे हैं प्रवासी श्रमिक

एक-एक वोट सुनिश्चित करने में जुटे हैं प्रत्याशी बालुरघाट : पंचायत चुनाव में एक-दो वोट से भी हार-जीत की गुंजाइश रहती है, इसिलए चुनाव में खड़े लोग एक-एक वोट को सुनिश्चित करने में लगे रहते हैं. ऐसे में काम के लिए दूसरे राज्यों में गये प्रवासी श्रमिकों को पंचायत चुनाव में घर बुलवाया जा रहा […]

एक-एक वोट सुनिश्चित करने में जुटे हैं प्रत्याशी
बालुरघाट : पंचायत चुनाव में एक-दो वोट से भी हार-जीत की गुंजाइश रहती है, इसिलए चुनाव में खड़े लोग एक-एक वोट को सुनिश्चित करने में लगे रहते हैं. ऐसे में काम के लिए दूसरे राज्यों में गये प्रवासी श्रमिकों को पंचायत चुनाव में घर बुलवाया जा रहा है.
दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट स्टेशन पर प्रवेश करते हुए गौड़ एक्सप्रेस को देखा गया. इस ट्रेन से प्रवासी श्रमिकों की एक लंबी कतार अपने गांव-जवार की तरफ जाती दिखी. एक मंडली में करीब 15 लोग थे. ये सभी बालुरघाट बस स्टैंड की तरफ जा रहे थे. गांव लौटने का इनका दो ही मकसद है. एक तो पंचायत चुनाव में वोट डालना और लगे हाथ अपनों परिजनों के साथ भेंट-मुलाकात.उल्लेखनीय है कि साल के 10 महीने हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जाकर ये श्रमिक अपने परिवार का निर्वाह करते हैं.
कई महीनों तक काम करने के बाद ये अपनी साल भर की कमाई लेकर अपने परिवार से मिलते हैं. आम तौर पर इन प्रवासी श्रमिकों को कोई राजनीतिक दल भाव नहीं देता है. लेकिन जब बात पंचायत चुनाव की हो, तो इनकी कद्र बढ़ जाती है. विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता इन श्रमिकों के साथ संपर्क कर उन्हें पंचायत चुनाव के दिन उपस्थित रहने के लिए गुजारिश करते हैं. उसके एवज में इन्हें तरह-तरह के सब्जबाग दिखाये जाते हैं.
प्रवासी श्रमिक भी अपनी मिट्टी से राजनीतिक संपर्क बनाये रखने के लिए मतदान में हिस्सा लेते हैं. मतदान में हिस्सा लेना इनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं. भले ही ये लोग अपनी जन्मभूमि से हजारों किलोमीटर दूर काम करते हों, लेकिन उनकी आत्मा इन गांवों में ही बसती है. ये लोग भी अब वोट की ताकत को समझने लगे हैं.

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