बर्दवान/दुर्गापुर/पानागढ़ :सालिसी सभा में नहीं पहुंचने पर एक बुजुर्ग की पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी. घटना पूर्व बर्दवान के कटवा थाना अंतर्गत श्रीखण्ड धोपापुकुर आदिवासी पाड़ा की है. मृतक का नाम नरेन मुर्मू है.
आरोप है कि उसे लाठी, रॉड से मारने के बाद ईंट,पत्थर से कुचल कर नृशंस हत्या कर दी गयी. मोरल (मुखिया) ने उसकी हत्या का निर्देश दिया था. कटवा थाना में इसकी शिकायत दर्ज करायी गयी है. पुलिस ने एक महिला सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कटवा के श्रीखंड के धोबापुकुर इलाके में 50-60 आदिवासी परिवार रहता है. ग्रामीणों ने मोरल से शिकायत की थी कि नरेन आसपास के घरों में झांकता है. महिलाओं पर छींटाकशी करता है.
शिकायत के आधार पर मोरल ज्योतिष हंसदा ने देर रात सालिसी सभा बुलायी. नरेन को उसमें बुलाया गया था. लेकिन जुर्माने के भय से वह नहीं पहुंचा. नाराज मोरल ने नरेन के घर पर हमला करने का आदेश दे दिया.
गांव के आदिवासी कुछ युवकों ने नरेन के घर पर पहले हमला किया, उसके बाद नरेन को घर से बाहर निकाल कर लाठी, रॉड से पीटने के बाद ईंट, पत्थर से कुचलकर उसे बुरी तरह जख्मी कर दिया. इधर, सूचना पाकर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और बुर्जुग आदिवासी नरेन मुर्मू को बरामद कर कटवा अनुमंडल अस्पताल लेकर गयी लेकिन कार्यरत चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
घटना को लेकर मृतका की पत्नी सुखी उर्फ मुनि मुर्मू ने कटवा थाने में अभियुक्त मोरल समेत 10 हमलावरों के खिलाफ अभियोग दायर किया है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. मुख्य आरोपी मोरल ज्योतिष हांसदा फरार है.घटना को लेकर गांव में तनाव तथा उत्तेजना है. पुलिस की गश्ती गांव में लगातार हो रही है.
इधर बेटी की डोली हुई रूखसत उधर उठा इकलौते चिराग का जनाजा
रानीगंज : वार्ड नंबर 88 अंतर्गत हुसैननगर निवासी ईसीएल कर्मी मोहम्मद इस्तेहार अली के घर से जिस समय उनकी उनकी बेटी सोबिया की डोली रु खसत हुई उसी समय उनके इकलौते 28 वर्षीय पुत्न एस्तेशाम अली उर्फ स्प्रिंकल का जनाजा निकला.
बारातियों के लिए बेड टी लेकर जा रहा स्प्रिंकल सड़क दुर्घटना काशिकार हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. खुशी का माहौल मातम में बदल गया. इस दृश्य को देखनेवालों का कलेजा मुंह को आ गया. आंखें आसुओं से भर गयी. पूरे मोहल्ले का हर शख्स गमगीन था. मोहल्ले में किसी भी घर में सोमवार को चूल्हा नहीं जला. हर किसी की जुबां पर एक ही दुआ थी कि अल्लाह यह दिन किसी दुश्मन को भी न दिखाये.
इस्तेहार अली की द्वितीय सुपुत्नी सोबिया का निकाह रानीगंज के पंजाबी मोड़ स्थित मिडवे होटल में संपन्न हुआ. सोमवार की सुबह स्प्रिंकल बारातियों के लिए बेड टी लेकर हुसैन नगर से होटल मिडवे मोटरसाइकिल से जा रहा था.
इसी क्र म में रोनाई स्थित विनय चौधरी अस्पताल के समीप नाबालिग 12 वर्षीय ट्रैक्टर चालक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया. दुर्घटना में उसके सर पर चोट लगी. घायल अवस्था में स्प्रिंकल को सबसे पहले रानीगंज के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया. स्थिति गंभीर देख उसे दुर्गापुर के विवेकानंद अस्पताल में रेफर किया गया. जहां उसने दम तोड़ दिया.
स्प्रिंकल की मौत की खबर ऐसी थी कि उसकी मां सबीना खातून, बहन सोबिया व अन्य तीन बहनों तथा पिता सहित घर में आये रिश्तेदारों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा. कौन किसकों संभाले? जहां शहनाई बज रही थी, वहां क्रंदन व चित्कार गूंजने लगा. उसके पिता इस्तेहार अली ने बताया कि उसकी किस्मत में उसके पुत्न स्प्रिंकल का इतना दिन ही साथ लिखा था.
अल्लाह को शायद उसकी जरु रत थी, उसे अपने पास बुला लिया. उन्होंने कहा कि उसका चेहरा आंखों के सामने बार-बार आ रहा है. कैसे खुद को संभाले और कैसे परिजनों को दिलासा दें? घर के अन्य सदस्यों को देखकर वह चाहकर भी अपनी पीड़ा जगजाहिर नहीं कर पा रहे हैं.
स्प्रिंकल के मामा तौफिक आलम ने कहा कि जबसे अंचल में अवैध कोयला का कारोबार चल रहा है, तब से कम उम्र के बच्चे मात्न तीन हजार रु पये के वेतन पर ट्रेक्टर चला रहे हैं एवं वाहन चलाने की जानकारी ना होने के कारण ही यह घटना घटी है. अगर इस पर रोक नहीं लगायी गयी तो आगे भी ऐसी घटना घटती रहेगी. उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चे सिर्फ ट्रेक्टर ही नहीं, टोटो भी चला रहे हैं एवं अक्सरहां दुर्घटना कर रहे हैं.
हेलमेट पहना होता तो शायद बच जाती जान
बाइक चलाते समय यदि स्प्रिंकल ने हेलमेट पहना होता तो शायद सर की चोट उसकी जानलेवा नहीं होती. वह सुबह मोटरसाइकिल से हुसैन नगर से पंजाबी मोड़ होटल मिडवे जा रहा था. बहन के बारातियों को बेड टी देनी थी.
रास्ते में उसे ट्रेक्टर द्वारा धक्का मारे जाने से उसके सिर पर गंभीर चोट लगने से ही उसकी मौत हुई. पुलिस का कहना है कि स्प्रिंकल हेलमेट पहने रहता तो शायद उसकी मौत नहीं होती. नवविवाहिता सोबिया एवं उसकी तीन बहनों को अपना इकलौता भाई नहीं खोना पड़ता. मां सबीना खातून की गोद सूनी नहीं होती एवं मोहम्मद इस्तेहार खान को अपनी बुढ़ापा का सहारा न खोना पड़ता. स्प्रिंकल के मामा ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि यह सच है कि उसने हेलमेट नहीं पहन रखा था. यदि उसने हेलमेट पहने होता तो शायद उनका भांजा बच जाता.
