सिलीगुड़ी. एक ओर जहां राज्य की मुख्यमंत्री निजी अस्पतालों पर नकेल की तैयारी में जुटी हुयी हैं,वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल पर चकित्सा में लापरवाही का आरोप सामने आया है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल पर एक गर्भवती महिला को बगैर इलाज के ही घर वापस भेज देने का आरोप लगा है. जिसकी वजह से बच्चे की मौत गर्भ के अंदर ही हो गयी.
इस बात के सामने आने के बाद ही सिलीगुड़ी जिला अस्पताल का माहौल मंगलवार को गरम हो गया .युवा कांग्रेस की डाबग्राम कमेटी की ओर से अस्पताल अधीक्षक को ज्ञापन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की. कांग्रेस समर्थकों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया.प्राप्त जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी के पूर्व चयनपाड़ा के रहने वाले निखिल मंडल अपनी पत्नी शांति मंडल को प्रसव वेदना के साथ 27 फरवरी को भरती करने के लिए जिला अस्पताल ले गये थे. दो दिन वह अस्पताल में भरती रही लेकिन डॉक्टरों ने कोइ चिकित्सा नहीं की.
पति निखिल मंडल ने आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों ने कहा कि अभी प्रसव का समय नहीं हुआ है और रोगी को घर ले जाने के लिए कहा. उसके बाद फरि रविवार को वह प्रसव वेदना के साथ पत्नी को लेकर यहां आये. उस दिन भी वापस लौटा दिया गया .उसके बाद वह अपनी पत्नी को लेकर एक निजी अस्पताल ले गये. वहां पत्नी ने एक मृत शिशु को जन्म दिया.
श्री मंडल ने कहा कि यदि उनकी पत्नी की पहले ही चिकित्सा हो जाती तो बच्चे को बचा पाना संभव था. इसबीच,अस्पताल अधीक्षक को ज्ञापन देने के बाद कांग्रेस नेता मनोज अग्रवाल ने ममता सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री ममता बनर्जी निजी अस्पतालों पर नकेल कसना चाहती हैं,वह करें.इसमें कोइ दिक्कत नहीं है,लेकिन सरकारी अस्पतालों की स्थिति भी तो सुधारें.
