सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक युवती के साथ बहस के बाद से छात्र लापता
मामले में पांच के खिलाफ शिकायत दर्ज
आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज
कोलकाता : सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक युवती के साथ बहस के बाद से छात्र लापता हो गया. यह घटना यादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रावास की है. छात्र सुशील मांडी के माता-पिता का आराेप है कि गुरुवार को उस बहस के बाद से ही उनका पुत्र लापता है. काफी खोजबीन के बाद भी सुराग नहीं मिलने पर अंत:त सोमवार को यादवपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर छात्र की तलाश आरंभ की गयी. सुशील हुगली जिले के धनियाखाली का रहनेवाला है. वह मोबाइल फोन अपने कमरे में ही छोड़ गया है.
यादवपुर विश्वविद्यालय के लापता छात्र सुशील मंडी (30) के परिजनों की ओर से मामले में पांच लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी गयी है. आरोप है कि वे फेसबुक पर सुशील को प्रताड़ित करते थे. आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. खबर लिखे जाने तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था. सूत्रों के अनुसार, सुशील दो फरवरी की सुबह करीब 7.30 बजे से यादवपुर मेन हॉस्टल से लापता है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.
कोलकाता/ नयी दिल्ली. राज्यसभा में सोमवार को तृणमूल सांसद ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नजीब अहमद के लापता होने के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार से इस मामले की सीबीआइ या अन्य समुचित एजेंसी से जांच कराने की मांग की. गौरतलब है कि नजीब 15 अक्तूबर से लापता है. एक रात पहले ही उसका परिसर में अभाविप सदस्यों के साथ कथित तौर पर विवाद हुआ था. तृणमूल कांग्रेस सांसद ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि राजनीतिक प्रतिशोध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है और नजीब के मामले में भी कारण यही है.
उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि 15 अक्तूबर से लापता नजीब को खोजने के लिए क्या कोई विशेष कदम उठाए गए हैं. इस मामले में जेएनयू प्रशासन पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए सांसद ने कहा कि क्या नजीब लापता व्यक्तियों के आंकड़ों का एक हिस्सा बन कर रह जाएगा. उन्होंने कहा कि इस घटना में कथित तौर पर संलिप्त अभाविप छात्रों से अब तक कोई पूछताछ तक नहीं की गई. यहां तक कि जेएनयू के कुलपति ने नजीब की मां से मिलने से भी इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है. हम देख रहे हैं कि देश में राजनीतिक प्रतिशोध कैंसर की तरह फैल रहा है.
