बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई के साथ : राय

कोलकाता: पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई के साथ हैं, क्योंकि किसी भी राष्ट्र के लोग सांप्रदायिक नहीं होते हैं तथा लोगों की आस्था धर्मनिरपेक्षता के प्रति ही होती है. हालांकि बांग्लादेश एक अलग राष्ट्र है और दूसरे […]

कोलकाता: पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई के साथ हैं, क्योंकि किसी भी राष्ट्र के लोग सांप्रदायिक नहीं होते हैं तथा लोगों की आस्था धर्मनिरपेक्षता के प्रति ही होती है.

हालांकि बांग्लादेश एक अलग राष्ट्र है और दूसरे राष्ट्र की आंतरिक नीति में भारत कोई हस्तक्षेप नहीं करता है, लेकिन बंगाल के निवासी होने के नाते बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष शक्ति के प्रति उनका व्यक्तिगत रूप से सहानुभूति व सहधर्मिता है. श्री राय शुक्रवार को विधानसभा में स्थित नौसर अली कक्ष में भारत बांग्लादेश मैत्री समिति के तत्वावधान में आयोजित सोनार बांग्ला-मुक्त भावना या सांप्रदायिकता विषय पर आयोजित परिचर्चा में भाग लेते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने अपने वक्तव्य में दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया. विधानसभा के अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कहा कि आतंकवाद प्रजातंत्र के लिए चुनौती है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में यदि अस्थिरता पैदा होती है, तो इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल व पूर्वोत्तर राज्यों पर भी पड़ता है.

किसी भी देश या राज्य का अस्थिरता में विकास नहीं हो सकता है, हालांकि यह बांग्लादेश का आंतरिक मामला है. इसमें भारत हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, लेकिन हाल में देश में राज्यसभा में एक ऐसा विधेयक पारित किया गया, जो संसदीय परंपरा के अनुरूप नहीं है. बांग्लादेश के लेखक व पत्रकार शाहरियार कबीर ने कहा कि 1971 में बांग्लादेश का जन्म एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में हुआ था, लेकिन यह दुर्भाग्य का विषय है कि इसमें सांप्रदायिक शक्तियों ने जकड़ लिया है.

अल्पसंख्यकों हिंदूओं पर योजना के तहत हमले हो रहे हैं. उनके घरों को जलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो बांग्लादेश में एक भी हिंदू नहीं बचेगा. अगर फिर जमायत-ए-उलेमा की सरकार बनती है, तो फिर 2001 की ही स्थिति होगी, जब बांग्लादेश में भारत विरोधी शिविर लगाये गये थे. बांग्लादेश में सांप्रदायिक ताकतों के उदय से भारत में भी मुश्किलें बढ़ेंगी.

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