कोलकाता : पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफे को लेकर बढ़ते दबाव के बीच उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली ने आज कहा कि वह जो भी करना होगा, करेंगे.
यौन उत्पीड़न के एक मामले की जांच के लिए गठित उच्चतम न्यायालय की एक समिति की ओर से प्रतिकूल टिप्पणी किये जाने के बाद से विवादों में घिरे गांगुली से जब संवाददाताओं ने बात करनी चाही, तो उन्होंने गुस्से में कहा, मैं आपके किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं दूंगा. मुझे जो भी करना होगा, मैं करुंगा. गांगुली ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित विभिन्न नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
बनर्जी ने गांगुली के खिलाफ तत्काल उचित कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दोबारा चिट्ठी लिख चुकी हैं, वहीं तृणमूल कंाग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्विटर पर आज विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर गांगुली से इस्तीफे की मांग की है.
तृणमूल सांसद ओ ब्रायन ने कहा, आज संयुक्त राष्ट्र विश्व मानवाधिकार दिवस है. उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक गांगुली डब्ल्यूबीएचआरसी के अध्यक्ष पद बने हुए हैं. महोदय, कृपया अपने कार्यालय का उपहास ना उड़ाये.
