कोलकाता: भारत में ऐतिहासिक टेलीग्राम सेवा बंद हो चुकी है. अब कभी भी इस देश में टेलीग्राम की टिक-टिक सुनाई नहीं देगी, पर भला हो हमारे देश की कार्य संस्कृति का, अभी तक 2600 से अधिक टेलीग्राम लंबित पड़े हुए हैं. 15 जुलाई को भारत में टेलीग्राम सेवा बंद कर दी गयी, पर आखिरी वक्त में टेलीग्राम भेज कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने वाले सैकड़ों लोगों के अरमान पर पानी फिर गया है. लंबित टेलीग्राम की इस सूची में बिहार और झारखंड सबसे ऊपर है. इस तालिका में राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, ओड़िसा, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल भी शामिल है. बिहार और झारखंड से बुक किये गये काफी संदेश तो अप्रैल 2013 से अभी तक प्राप्तकर्ता तक नहीं पहुंचा है. बिहार में लोगों तक नहीं पहुंचने वाले टेलीग्राम की संख्या 1878 है. जो इस तालिका में सबसे अधिक है. इसके साथ ही यह आंकड़ा बिहार की कार्य संस्कृति की वास्तविक तसवीर भी पेश करता है.
कोलकाता स्थित सेंट्रल टेलीग्राफ ऑफिस (सीटीओ) के एक अधिकारी ने बताया कि टेलीग्राम सर्विस ने हमें उस जगह तक पहुंचने में सहायता की थी, जहां अभी तक मोबाइल फोन तक नहीं पहुंचा है. पर कर्मियों की गफलत, लापरवाही व काम न करने की फितरत ने सरकार को इस परिसेवा को बंद करने के लिए बाध्य कर दिया. दुख की बात यह है कि इस सर्विस के बंद होने के बावजूद अभी तक सैकड़ों संदेश लंबित पड़े हुए हैं.
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने सभी सेंट्रल टेलीग्राफ ऑफिस को पत्र लिख कर लंबित टेलीग्रामों को उसके गंतव्य स्थलों तक जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए कहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल जून महीने में टेलीग्राम करने वालों से विभाग को 3319780 रुपये की आमदनी हुई थी. इतनी आमदनी होने का एकमात्र कारण लोगों में आखिरी क्षणों में इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने का जुनून था.
