कोलकाता : पूर्व रेलमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता मुकुल राय से सारधा घोटाला मामले में सीबीआइ की पूछताछ पूरी हो चुकी है. तकरीबन चार घंटे तक चली इस पूछताछ के बाद सीबीआइ ने मुकुल राय को जाने दिया है औरआगे भी जरूरत के मुताबिक पूछताछ करने की बात कही है.साल्ट लेक में सीबीआइ कार्यालय में करीब पांच घंटे की पूछताछ के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मैं चाहता हूं कि असली सच सामने आए. मैंने सीबीआइ को बताया कि यदि वे समझते हैं कि यह जरूरी है तो वे मुङो किसी भी समय बुला सकते हैं , मैं बात कर सकता हूं. असली सच सामने आना चाहिए. जांच उचित तरीके से होनी चाहिए.’’ तीन दौर में पूछताछ का सामना करने वाले पूर्व रेल मंत्री ने कहा, ‘‘पहले दिन से मैं कहता आ रहा था कि यदि जांच एजेंसी मुङो जांच के लिए बुलाती है तो मैं जांच में शामिला होउंगा और सहयोग करुंगा.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं यहां तय समय के अनुसार सुबह साढ़े दस बजे पहुंच गया था.’’ राज्यसभा सदस्य मुकुल राय को सीबीआइ ने पहले 12 जनवरी को बुलाया था जो उस समय दिल्ली में थे. उन्होंने उस समय कहा था कि वह कोलकाता लौटने के बाद सबसे पहले सीबीआइ से मिलेंगे.
बताया जा रहा है कि इस पूछताछ के दौरान मुकुल राय का रवैया सहयोगात्मक रहा और आगे की पूछताछ को लेकर मुकुल राय ने कहा है किजरूरत पड़ने पर वे फिर से सीबीआइ के सामने उपस्थित होंगे. राय ने इस जांच में सीबीआइ को अपनी तरफ से उपयुक्त सहयोग का आश्वासन दिया है.
आज सुबह सीबीआइ कार्यालय में पेश होने के दौरान वे सुरक्षा कर्मियों व मीडिया कर्मियों से घिरे हुए थे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी. उन्होंने कहा कि उन्हें सीबीआइ ने पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा था, इसलिए जांच प्रक्रिया में मदद करने के लिए मैं यहां उपस्थित हुए थे. उल्लेखनीय है कि सीबीआइ ने अरबों रुपये के सारधा चिटफंड घोटाले में पूछताछ के लिए उन्हें अपने दफ्तर तलब किया था.
उन्होंने मीडिया से कहा कि जैसा कि मैंने पहले कहा था कि मैंने अपनी ओर से या पार्टी की ओर से कोई गलती नहीं की है. उन्होंने कहा कि उसी बात को आज मैं फिर दोहरा रहा हूं. मुकुल राय को सीबीआइ ने पहली बार 12 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन उस वक्त वे दिल्ली में थे और उन्होंने कहा था कि कोलकाता लौटने के बाद सीबीआइ से मिलेंगे. 14 जनवरी को कोलकाता पहुंचने के बाद उन्होंने सीबीआइ से पूछताछ के लिए 15 दिन का समय मांगा था. इसके पीछे उन्होंने दलील दी थी कि राज्य की दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव में उनकी व्यस्तता है, इसलिए उन्हें थोड़ा समय चाहिए.
