ममता के अशालीन बोल पर बवाल

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर सुर्खियों में हैं. इस बार अपने अशालीन आचरण को लेकर. बुद्धिजीवियों से लेकर राजनीतिक दलों ने उनके इस आचरण की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि सीएम की इस हरकत से बांग्ला भाषा व बंगाल की धरती का अपमान हुआ है. एक महिला सीएम से ऐसी कत्तई उम्मीद नहीं थी. […]

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर सुर्खियों में हैं. इस बार अपने अशालीन आचरण को लेकर. बुद्धिजीवियों से लेकर राजनीतिक दलों ने उनके इस आचरण की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि सीएम की इस हरकत से बांग्ला भाषा व बंगाल की धरती का अपमान हुआ है. एक महिला सीएम से ऐसी कत्तई उम्मीद नहीं थी.

कोलकाता/जलपाईगुड़ी: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान को लेकर फिर बवाल मच गया है. बुधवार को जलपाईगुड़ी में विभिन्न परियोजनाओं के उदघाटन अवसर पर सुश्री बनर्जी ने मीडिया की आलोचना करते हुए कहा : ‘‘साराखोन पिछोने की कोरे बांबू देबा जाये..’’ यानी कुछ लोग हमेशा पीछे से बंबू (बांस) देने की ताक में रहते हैं. बंबू जंगल में होता है व इसका इस्तेमाल घर बनाने के लिए होता है. लेकिन जब आप किसी को बंबू देने की कोशिश करते हैं और यह जब पलट कर पीछा करता है, उस समय आपकी समझ में आता है कि इसमें असली मजा क्या है.

पहले भी ईल बोल चुकी हैं सीएम

इससे पहले भी ममता बनर्जी ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित तृणमूल कांग्रेस की सभा में ईल शब्दों का प्रयोग किया था. तब इसकी कड़ी आलोचना हुई थी.

बुद्धिजीवियों व नेताओं ने की बयान की निंदा

ममता बनर्जी द्वारा बयान में अश्लील भाषा का इस्तेमाल करने को लेकर तूफान खड़ा हो गया है. विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसकी आलोचना की है. बुद्धिजीवियों का कहना है कि बांग्ला जैसी गौरवशाली भाषा को विद्रूप करने की कोशिश चल रही है. रवींद्रनाथ टैगोर, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, नजरूल इसलाम जैसे महापुरुषों की धरती को शर्मसार कर रही हैं सीएम.

मुख्यमंत्री से इस तरह की भाषा के प्रयोग करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है. यह पश्चिम बंगाल की संस्कृति से नहीं मेल खाती. उनकी भाषा और भंगिमाओं से बंगाल की संस्कृति का अपमान हुआ है.

सुजन चक्रवर्ती,

पूर्व सांसद, माकपा

विद्यासागर व टैगोर की मिट्टी के लोगों से इस तरह की भाषा की आशा नहीं की जा सकती है. सिर शर्म से झुक गया है. यदि सीएम ऐसी भाषा बोलेंगी, तो तापस पाल जैसे नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है.

एसएस अहलूवालिया

भाजपा सांसद

सीएम की इस भाषा से बंगाल का सिर शर्म से झुक गया है. जब मुख्यमंत्री ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेंगी, तो उस राज्य में महिलाओं की इज्जत कैसे बची रहेगी. घर के लोग व बच्चे कैसे इस तरह की भाषा सहन करेंगे.

अब्दुल मन्नान, कांग्रेस नेता

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