नरेंद्र मोदी की चर्चा महंगी पड़ी, मामले में फंसाया

कोलकाता: भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चर्चा करना भी सुबह की सैर करने वाले कुछ लोगों पर भारी पड़ गया है. दक्षिण कोलकाता के रवींद्र सरोवर में बुधवार सुबह मोदी पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी और सुबह सैर करने आने वाले लोगों में हुई तीखी बहस तथा नोकझोंक को लेकर कुछ […]

कोलकाता: भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चर्चा करना भी सुबह की सैर करने वाले कुछ लोगों पर भारी पड़ गया है. दक्षिण कोलकाता के रवींद्र सरोवर में बुधवार सुबह मोदी पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी और सुबह सैर करने आने वाले लोगों में हुई तीखी बहस तथा नोकझोंक को लेकर कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ सांसद के अंगरक्षक (बॉडीगार्ड) की ओर से आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है.

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पूर्व क्षेत्र) देवब्रत दास ने बताया कि लेक गार्डेन इलाके के रवींद्र सरोवर में बुधवार सुबह हुई घटना के बाद सांसद कल्याण बनर्जी के अंगरक्षक शुभेंदु बनर्जी की तरफ से लेक थाने में जनरल डायरी दर्ज करायी गयी थी.

लेकिन बुधवार देर रात उनकी तरफ से लेक थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी गयी. आइपीसी की धारा 506 (आपराधिक धमकी देना के तहत शिकायत: दो से पांच वर्ष की सजा का प्रावधान), आइपीसी की धारा 353 (आपराधिक घटना के दौरान सरकारी कर्मचारी को काम में बाधा देना: दो वर्ष की कैद की सजा का प्रावधान) और धारा 341 (जबरन किसी व्यक्ति को रोक कर रखना: एक महीने से ज्यादा कैद और पांच सौ रुपये तक जुर्माना या फिर दोनों की सजा का प्रावधान) के तहत मामला दर्ज किया गया है. लेक थाने की पुलिस ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है.

गुरुवार को सुबह सैर करने वालों से हुई पूछताछ

रवींद्र सरोवर में गुरुवार सुबह प्रात: भ्रमण पर आये लोगों ने बताया कि बुधवार की घटना के बाद गुरुवार को लेक थाने के अतिरिक्त प्रभारी के नेतृत्व में जांच अधिकारी रवींद्र सरोवर में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने रोजाना यहां सुबह की सैर करना वालों के साथ बात की. लोगों ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने बुधवार की घटना के समय कौन वहां मौजूद था और कौन-कौन रोजाना वहां सैर के लिए आते हैं, इस बारे में लोगों से पूछताछ हुई.

पार्क की बढ़ायी गयी सुरक्षा

लेक थाने के अधिकारियों के मुताबिक बुधवार की घटना के बाद रवींद्र सरोवर पार्क की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. पुलिस के मुताबिक इस घटना की जानकारी के बाद कुछ मंत्रियों व सांसदों ने पुलिस से जानकारी ली. इस बारे में मंत्रियों ने इस पार्क की सुरक्षा को और बढ़ाने का निर्देश दिया. पार्क में चार से छह कांस्टेबलों के साथ एक सब इंस्पेक्टर को भी तैनात किया गया है.

कल्याण बनर्जी जनता से माफी मांगें

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि उन्होंने गुरुवार को राज्यपाल के सामने यह मुद्दा उठाया. राज्य में गैर बंगालियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह लोकतंत्र पर हमला है. एक सांसद शपथ लेता है कि वह जाति, धर्म व भाषा या संप्रदाय के नाम पर भेदभाव नहीं करेगा, लेकिन कल्याण बनर्जी ने इसका उल्लंघन किया है. उन्हें बिना शर्त अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए.

राजनीतिक कटुता अब खत्म होना जरूरी

सामाजिक चिंतक सीताराम शर्मा ने कहा : बंगाल अपने प्रगतिशील विचारों, धर्मनिरपेक्षता एवं सर्वोपरि राजनीतिक सहिष्णुता के लिए जाना जाता है. ऐसे कई उदाहरण हैं, जबकि पति एवं पत्नी तथा भाई-भाई अलग राजनीतिक दल के नेता रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अजय मुखर्जी कांग्रेस में थे और उनके भाई विश्वनाथ मुखर्जी भाकपा में थे. इस सहिष्णुता को बना कर रखना आवश्यक है. राजनीतिक विचारों में मतभेद एक स्वाभाविक प्रक्रिया है एवं हाल के लोकसभा चुनाव के दौरान विचारों के टकराव का मौहाल बना था. चुनाव के बाद अब जनता के निर्णय के बाद जो कटुता एवं विरोध की भावना उत्पन्न हुई थी, उसकी समाप्ति होना आवश्यक है. ढ़ाकुरिया लेक या रवींद्र सरोवर लेक की घटना समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई है. वे शुभ नहीं हैं. बंगाल भाईचारा और आपसी सौहार्द की भूमि रही है और यहां पर बंगाल में सभी जाति, संप्रदाय एवं धर्म के लोग वर्षो से भाईचारे के साथ या आपसी मेलजोल के साथ रहते आये हैं.

कल्याण बनर्जी का व्यवहार शर्मनाक

माकपा सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा : एक सांसद, विधायक या जनप्रतिनिधि से अच्छी भाषा व व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने रवींद्र सरोवर लेक में जिस तरह का व्यवहार किया, वह शर्मनाक व निंदनीय है. इसके पहले भी कल्याण बनर्जी ने माकपा नेताओं के प्रति इसी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसे लेकर कुछ लोग उत्साहित भी हुए थे.

लेकिन पश्चिम बंगाल की धरती शांति और सामाजिक एकता व सौहार्द की धरती रही है. यहां भाषा या वर्ग के आधार पर इस तरह का भेदभाव कभी नहीं हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं, जो पूरी तरह से निंदनीय है.

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