Varanasi Ganga flood: वाराणसी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है. बीते 24 घंटे में नदी का पानी करीब छह फीट ऊपर आया है, जिससे घाटों पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. कई प्रमुख घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं. बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर गंगा में छोटी और बड़ी नावों के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. प्रशासन ने भी निगरानी बढ़ा दी है.
छह सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रहा पानी
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक वाराणसी में गंगा का जलस्तर करीब 64.70 मीटर दर्ज किया गया है. नदी का पानी लगभग छह सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है. फिलहाल गंगा चेतावनी बिंदु से करीब पांच मीटर नीचे बह रही है. लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और जल पुलिस की चिंता बढ़ गई है. अधिकारियों की नजर नदी के हालात पर बनी हुई है और आने वाले दिनों में स्थिति की लगातार समीक्षा की जाएगी.
40 से ज्यादा घाट पानी में डूबे
गंगा के बढ़ते पानी का असर वाराणसी के घाटों पर साफ दिखाई दे रहा है. शहर के 40 से ज्यादा घाटों के बड़े हिस्से पानी में समा चुके हैं. घाटों पर पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान प्रभावित होने लगे हैं. पानी बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही भी सीमित हो गई है. कई स्थानों पर सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई है. प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और सावधानी बरतें.
तीसरी बार बदली गंगा आरती की जगह
दशाश्वमेध घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती का स्थान तीसरी बार बदला जा चुका है. घाट पर पानी बढ़ने के कारण पुरोहितों की कई चौकियां और पूजा सामग्री भी प्रभावित हुई है. अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में गंगा आरती घाट की सीढ़ियों के बजाय ऊपरी हिस्से या छत से कराई जा सकती है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए उनकी संख्या सीमित रखने की तैयारी भी की जा रही है.
नाविकों की आजीविका पर पड़ा असर
गंगा में नाव संचालन बंद होने से वाराणसी के नाविकों की रोजी रोटी पर सीधा असर पड़ा है. शहर में बड़ी संख्या में परिवार नाव चलाकर अपनी आय जुटाते हैं. जलस्तर बढ़ने के कारण अब उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है. हालांकि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने नाव संचालन रोकने का फैसला लिया है. अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर कम होने और परिस्थितियां सुरक्षित पाए जाने के बाद नाव चलाने की अनुमति दोबारा दी जा सकती है.
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