UP Crime News: उत्तर प्रदेश एटीएस ने आजमगढ़ से प्रतिबंधित आतंकी संगठन अलकायदा इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया है. एटीएस के मुताबिक, नबील सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को आतंकी विचारधारा से जोड़ रहा था. वह उन्हें मुजाहिद बनने के लिए तैयार करने और आगे प्रशिक्षण दिलाने की योजना बना रहा था. जांच में उसके कई सोशल मीडिया ग्रुप और विदेशों में मौजूद लोगों से संपर्क की जानकारी सामने आई है.
सोशल मीडिया पर बना रहा था नेटवर्क
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने बताया कि एटीएस को नबील के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी. आरोप है कि वह AQIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहा था. इसके लिए वह सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड ग्रुप का इस्तेमाल करता था. एटीएस ने नबील के खिलाफ अपने थाने में एफआईआर दर्ज की. इसके बाद उसे आजमगढ़ से गिरफ्तार किया गया. उसके मोबाइल फोन की जांच में AQIS से जुड़ी सामग्री और एक व्हाट्सएप ग्रुप की जानकारी मिलने की बात कही गई है.
ग्रुप में सदस्यों को कहता था 'मुजाहिद'
एटीएस के अनुसार, नबील ने 'ला गालिब-इल्लल्लाह' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था. इसमें जुड़े सदस्यों को वह 'मुजाहिद' कहकर संबोधित करता था. ग्रुप में जिहाद और अन्य गतिविधियों के लिए अलग-अलग कोड शब्दों के इस्तेमाल का भी आरोप है. जांच एजेंसी का कहना है कि नबील ने आतंकी विचारधारा से जुड़ी किताबें भी ग्रुप में साझा की थीं. इनमें अलकायदा आतंकी अनवर उल अवलाकी की किताब और AQIS के पूर्व प्रमुख मौलाना आसिम उमर की किताब शामिल है. ग्रुप के सदस्यों से इन किताबों को पढ़ने की अपील भी की गई थी.
बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब के लोगों से संपर्क
एटीएस के मुताबिक, नबील कई अन्य व्हाट्सएप ग्रुप से भी जुड़ा था. इनमें बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब के लोग भी शामिल थे. एजेंसी का दावा है कि इन ग्रुप में अलकायदा की विचारधारा से जुड़ी सामग्री साझा की जाती थी. नबील पर पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश जाकर प्रशिक्षण लेने की तैयारी करने का भी आरोप है. एटीएस के मुताबिक, वह अपने साथियों के साथ भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर भी योजना बना रहा था. उसके संपर्कों और गतिविधियों की जांच जारी है.
रिमांड पर लेने की तैयारी में एटीएस
एटीएस अब नबील से उसके नेटवर्क और संपर्कों के बारे में पूछताछ करेगी. एजेंसी उसे अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी. जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उसके संपर्क में कितने लोग थे और सोशल मीडिया के जरिए किस तरह का नेटवर्क तैयार किया जा रहा था.
Also Read: गोरखपुर में रजिस्ट्री कराने पहुंचे सैकड़ों लोग, अचानक क्यों लौटना पड़ा खाली हाथ?
