UP News: उत्तर प्रदेश सरकार सर्पदंश से होने वाली मौतों पर लगाम लगाने और एंटी-वेनम के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. राजधानी लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में प्रदेश के पहले सरकारी स्नेक वेनम एक्सट्रैक्शन सेंटर का शिलान्यास अक्टूबर के पहले सप्ताह में वाइल्डलाइफ वीक के दौरान किया जाएगा. इस अत्याधुनिक सेंटर के निर्माण के बाद इसके दैनिक संचालन और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश वन निगम को सौंपी जाएगी.
विष निष्कर्षण और वैज्ञानिक शोध पर विशेष जोर
इस नए सेंटर में प्रदेश की प्रमुख विषैली सर्प प्रजातियों के विष का वैज्ञानिक तरीकों से सुरक्षित निष्कर्षण और भंडारण किया जाएगा. इसके साथ ही विष की विषाक्तता, जैविक घटकों और स्थानीय सांपों के जहर की प्रकृति पर गहन शोध होगा. केंद्र को आधुनिक रूप देने के उद्देश्य से विशेषज्ञों की एक टीम ने गुजरात के वलसाड स्थित स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया. इसी मॉडल के आधार पर कुकरैल सेंटर की तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी.
चार प्रमुख विषैले सांपों के जहर पर रहेगा फोकस
कुकरैल सेंटर में विशेष रूप से चार प्रमुख विषैली सर्प प्रजातियों—इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर के विष का संग्रह और गहन अध्ययन किया जाएगा. इन्हीं प्रजातियों के जहर का इस्तेमाल प्रभावी एंटी-वेनम तैयार करने में होता है. स्थानीय सर्प प्रजातियों के विष पर शोध करने से उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार अधिक असरदार और सटीक एंटी-वेनम तैयार किया जा सकेगा, जिससे आपातकाल में सर्पदंश पीड़ितों को तुरंत और बेहतर इलाज आसानी से मिल सकेगा.
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