UP News: उत्तर प्रदेश में सरकारी राशन की दुकानों से मिलने वाले चावल को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रांतियां सामने आती रहती हैं. चावल में कुछ दाने सामान्य चावल से अलग और प्लास्टिक जैसे दिखाई देने पर लोग इसे लेकर सवाल उठाते हैं. हालांकि, ये दाने प्लास्टिक के नहीं बल्कि फोर्टिफाइड राइस के होते हैं, जिन्हें पोषण बढ़ाने के उद्देश्य से चावल में मिलाया जाता है.
प्लास्टिक जैसा क्यों दिखता है चावल?
फोर्टिफाइड राइस देखने में सामान्य चावल के दानों से थोड़ा अलग दिखाई दे सकता है। इसका कारण इसकी निर्माण प्रक्रिया और इसमें मिलाए जाने वाले पोषक तत्व हैं. इसी वजह से कई बार लोग इसे प्लास्टिक का चावल समझ लेते हैं. जबकि वास्तव में ये चावल के ही दाने होते हैं, जिन्हें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे जरूरी पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है.
फोर्टिफाइड राइस में क्या होता है?
फोर्टिफाइड राइस में मुख्य रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल किए जाते हैं. इन पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद करने के उद्देश्य से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जाता है. सरकारी राशन व्यवस्था में ऐसे चावल को सामान्य चावल के साथ मिलाकर लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता है, ताकि नियमित भोजन के जरिए पोषण मिल सके.
यूपी में राशन के चावल को लेकर समझें सच्चाई
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन पाने वाले लोगों के बीच फोर्टिफाइड राइस को लेकर जागरूकता जरूरी है. चावल में अलग दिखने वाले दानों को देखकर उसे प्लास्टिक समझना सही नहीं है. ये दाने फोर्टिफाइड राइस होते हैं और इनमें जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलाए जाते हैं. इसलिए केवल अलग आकार या बनावट देखकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इसकी वास्तविकता समझना जरूरी है.
क्यों जरूरी है फोर्टिफाइड राइस?
आहार में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। फोर्टिफाइड राइस इसी कमी को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है. इसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व जोड़े जाते हैं. राशन के माध्यम से मिलने वाले चावल में इनका इस्तेमाल करने का उद्देश्य लोगों तक नियमित भोजन के जरिए अतिरिक्त पोषण पहुंचाना और पोषण संबंधी कमियों से निपटने में मदद करना है.
