एक के बाद एक जिम्मेदारी बस्ती से दिल्ली तक, भाजपा युवा मोर्चा के प्रभारी बने हरीश द्विवेदी, आखिर क्या है बीजेपी का सियासी संदेश

UP Politics: भारतीय जनता पार्टी में हरीश द्विवेदी का कद लगातार बढ़ रहा है. राष्ट्रीय महामंत्री के बाद अब उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है. उनकी बढ़ती जिम्मेदारियों के पीछे पूर्वांचल के ब्राह्मण वोटों को साधने की रणनीति हो सकती है.

UP Politics: भारतीय जनता पार्टी में हरीश द्विवेदी का कद लगातार बढ़ रहा है. राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है. इससे पहले राजस्थान के निकाय चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी. लगातार मिलती नई भूमिकाओं ने यूपी की राजनीति में एक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या बीजेपी हरीश द्विवेदी के जरिए पूर्वांचल के ब्राह्मण वोटों को साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है?

लगातार बढ़ रहा हरीश द्विवेदी का कद

पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को बीजेपी ने अब भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया है. पार्टी ने 10 सितंबर को विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा की. इसमें युवा मोर्चा की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को मिली. इससे पहले अगस्त में उन्हें राजस्थान के आगामी स्थानीय निकाय चुनाव का प्रभारी बनाया गया था. इसके कुछ ही दिन बाद उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महामंत्री भी नियुक्त किया गया.

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक

हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ. वह 1991 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े. इसके बाद संगठन में लगातार आगे बढ़ते गए. भाजयुमो में भी उन्होंने कई जिम्मेदारियां संभालीं. 2010 से 2013 तक वह उत्तर प्रदेश भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष रहे. संगठन में लंबे अनुभव के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं.

दो बार सांसद रह चुके हैं द्विवेदी

हरीश द्विवेदी ने 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया. उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार संसद में जगह बनाई. 2019 में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और वे दोबारा सांसद चुने गए. सांसद रहने के बाद संगठन में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती गई.

ब्राह्मण समीकरण पर बीजेपी की नजर?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हरीश द्विवेदी को संगठन में लगातार अहम जिम्मेदारियां मिलने के बीच यूपी का जातीय समीकरण भी चर्चा में है. द्विवेदी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पहचान बस्ती से जुड़ी है. ऐसे में उनके बढ़ते कद को ब्राह्मण समाज तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. हालांकि बीजेपी ने उनकी नियुक्ति को ब्राह्मण समीकरण से जोड़कर कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है. इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

क्या दूर होगी कथित नाराजगी?

विपक्ष लंबे समय से यूपी में ब्राह्मण समाज की कथित नाराजगी का मुद्दा उठाता रहा है. ऐसे में बीजेपी का हरीश द्विवेदी जैसे ब्राह्मण नेताओं को संगठन में लगातार बड़ी जिम्मेदारियां देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि पार्टी की ओर से यह नहीं कहा गया है कि इन नियुक्तियों का मकसद किसी खास जातीय समीकरण को साधना है. फिर भी हरीश द्विवेदी का बढ़ता कद पूर्वांचल के साथ-साथ यूपी की सियासत में नए संकेत जरूर दे रहा है.

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By अंजली कश्यप

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