UP News: उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस अभियानों के बीच एक बार फिर एनकाउंटर की कार्रवाई चर्चा में है. बीते कुछ वर्षों में सामने आए कई मामलों में घायल आरोपी के पैर में गोली लगने की बात सामने आई है, जिसे लेकर विपक्ष और कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं. पुलिस का दावा है कि ये मुठभेड़ आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई का हिस्सा हैं, जबकि आलोचक लगातार एनकाउंटर के तरीके और उसकी पारदर्शिता पर बहस की मांग करते रहे हैं. इसीबीच पूर्व DIG अमिताभ ठाकुर और एडवोकेट मनोज राय हंस ने एनकाउंटर को लेकर कई अहम राज खोले हैं.
सिर्फ जगह बदलती है स्क्रिप्ट नहीं
पूर्व डीआईजी ने प्रभात खबर से हुई बातचीत में बताया कि उत्तर प्रदेश में जब से ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ शुरू हुआ है, तब से अक्सर एक ही तरह की कहानी सामने आती है. पुलिस के प्रेस नोट में भी कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिलता. लगभग हर मुठभेड़ की कहानी कुछ इसी तरह होती है—हत्या जैसे गंभीर मामलों में आरोपी फरार चल रहा था, पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली, पुलिस ने बताए गए स्थान पर दबिश दी, आरोपी ने भागने की कोशिश की और फिर हुई मुठभेड़ में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. यही स्क्रिप्ट लगभग हर एनकाउंटर में दोहराई जाती नजर आती है. फर्क सिर्फ इतना होता है कि आरोपी का नाम, उस पर दर्ज मुकदमों का विवरण और मुठभेड़ की जगह बदल जाती है. लेकिन एक चीज जो नहीं बदलती, वह है यूपी पुलिस की बंदूक से निकली गोली का निशाना, जो अक्सर आरोपी के पैर पर ही जाकर लगती है.
केस 1: बीते 19 जुलाई की रात 11 बजे बलिया जनपद के गड़वार थाने की पुलिस ने नुरपूर नहर पुलिया के पास मुठभेड़ में सौरभ उपाध्याय को गिरफ्तार किया. इस मुठभेड़ में सौरभ के दाहिने पैर में गोली लगी. जैसा कि आप फोटो में भी देख सकते हैं.
केस:2 जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं गोली वही पैर में लगी है. आरोपी का नाम गुड्डू उर्फ तौफीक है. तौफीक भाई की हत्या के मामले में फरार चल रहा था, थाना शेरगढ़ की पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार किया. गोली वहीं पर लगी है, पैर भी दाहिना है और जगह भी वही है.
केस 3: फिरोजाबाद रपड़ी के जंगल में बीते 19 जुलाई को ही एक और एनकाउंटर हुआ, आरोपी का नाम तेज सिंह है. गौर से देखेंगे तो इस बार भी गोली पैर में लगी है. सिर्फ दाहिने पैर की जगह बायां पैर है.
केस 4: बीते 20 जुलाई को ही बदायूं में एक और एनकाउंटर हुआ, यहां आरोपी 25 हजार का इनामिया था और मुठभेड़ में यहां भी हमेशा की तरह आरोपी को दाहिने पैर में गोली लगी और वहीं पर लगी जहां पर बराबर लगती है.
जूट का बोरा लपेटकर मारी जाती है गोली
"वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज राय हंस ने पुलिस मुठभेड़ों पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में हो रहे कई एनकाउंटर फर्जी हैं. उनका दावा है कि कई मामलों में लोगों को घर से उठाकर लाया जाता है, फिर जूट के बोरे को पानी में भिगोकर पैर में लपेटकर एकदम पास से गोली मारी जाती है, फिर तय कहानी के तहत मुठभेड़ का रूप दिया जाता है.
पुलिस वालों पर भी दर्ज हो एक FIR: पूर्व डीआईजी अमिताभ ठाकुर
पूर्व डीआईजी अमिताभग ठाकुर के अनुसार औपचारिक या अनौपचारिक रूप से ऑपरेशन लंगड़ा जैसे शब्दों का प्रयोग कर चलाया गया कोई भी पुलिस का कार्य या ऑपरेशन प्राथमिक स्तर पर ही आपत्तिजनक है. क्योंकि पुलिस का दायित्व लोगों की रक्षा करना और उनमें सुरक्षा की भावना विकसित करना है, ना कि किसी को लंगड़ा बनाना. मेरी समझ में पुलिस लगातार इस प्रकार के काम इस कारण कर रही है, क्योंकि संविधान की रक्षा के लिए बनी अन्य संस्थाएं, जैसे न्यायपालिका, मानवाधिकार आयोग, मीडिया आदि पुलिस के इन कार्यों को जाने अनजाने संरक्षण दे रहे हैं. मेरी यह मांग है कि जब भी पुलिस का कथित एनकाउंटर हुआ करें तो उस समय निश्चित रूप से पुलिस वालों पर भी एक एफआईआर दर्ज हो, जिससे इस प्रकार के ऑपरेशन करने की चाहत खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएगी.
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