UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. सरकार ने एनालॉग पनीर, घी और खोया की बिक्री पर रोक लगा दी है. कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री पर लगाम लगाना है, जिन्हें पारंपरिक डेयरी उत्पादों की तरह बेचे जाने से उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की आशंका रहती है. खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान के तहत 25 इकाइयों पर कार्रवाई की और करीब 7,686 किलो सामग्री नष्ट की.
क्या होते हैं एनालॉग डेयरी उत्पाद
एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जो पारंपरिक डेयरी उत्पादों की तरह दिखते या इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन उनकी संरचना पूरी तरह दूध आधारित नहीं होती. इनमें दूध से मिलने वाले कुछ घटकों की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च या अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे उत्पादों को उनकी वास्तविक सामग्री और प्रकृति की स्पष्ट जानकारी के साथ बेचना जरूरी है, ताकि ग्राहक भ्रमित न हों.
क्या एनालॉग पनीर नकली पनीर है
एनालॉग उत्पाद को सीधे तौर पर 'नकली' कहना सही नहीं है. यह पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग उत्पाद होता है. समस्या तब होती है, जब किसी एनालॉग उत्पाद को उसकी वास्तविक सामग्री की जानकारी दिए बिना पारंपरिक डेयरी उत्पाद के तौर पर बेचा जाए. ऐसे में ग्राहक को उत्पाद की सही जानकारी नहीं मिल पाती और वह भ्रमित हो सकता है.
क्या है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर तैयार करने में दूध से मिलने वाले घटकों की जगह या उनके साथ वनस्पति तेल, स्टार्च और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है. इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसी बनावट तैयार की जाती है, जो पनीर जैसी दिखाई दे. हालांकि, हर एनालॉग उत्पाद में एक जैसी सामग्री या बनाने की प्रक्रिया नहीं होती. इसलिए सभी एनालॉग पनीर के लिए एक ही बनाने की विधि बताना सही नहीं होगा.
UP में क्यों हुई कार्रवाई
सरकार की कार्रवाई का फोकस मिलावटी और अवैध डेयरी उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने पर है. रिपोर्ट के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग ने 25 इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 7,686 किलो सामग्री नष्ट की. सरकार ने एनालॉग पनीर, घी और खोया की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है. कार्रवाई का उद्देश्य डेयरी उत्पादों के नाम पर होने वाली भ्रामक बिक्री और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर लगाम लगाना है.
