UP News: मुस्लिम समाज में प्रचलित तलाक-ए-हसन, तलाक-ए-अहसन और एकतरफा तलाक की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. अदालत ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार या अन्य पक्षकार जवाब दाखिल नहीं भी करते हैं, तब भी पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार UP की कई महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का इंतज़ार कर रही है .
व्हाट्सएप और ईमेल से 'वर्चुअल तलाक' पर अदालत की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि कई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नियों को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए तलाक दे रहे हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि पीड़ित महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई हर हाल में होगी.
धार्मिक परंपरा का सम्मान, लेकिन मानवाधिकार सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका को सभी धर्मों की परंपराओं और मान्यताओं का सम्मान करना चाहिए तथा धार्मिक मामलों में न्यूनतम हस्तक्षेप करना चाहिए. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई धार्मिक प्रथा किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों या वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, तो न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक होगा.
केंद्र को पहले ही जारी हो चुका है नोटिस
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर चुका है. अदालत का कहना है कि जवाब दाखिल होने का इंतजार करते हुए पीड़ित महिलाओं को न्याय से वंचित नहीं रखा जा सकता, इसलिए निर्धारित तिथि पर सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी.
पीड़ित महिलाओं ने सुनाई नाइंसाफी की दास्तान
गाजियाबाद की रहने वाली स्वतंत्र पत्रकार बेनजीर हीना समेत कई तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की याचिकाएं लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. महिलाओं का आरोप है कि उनके पतियों ने बिना किसी बातचीत या सुलह की कोशिश के केवल एक व्हाट्सएप संदेश या ईमेल भेजकर रिश्ता खत्म कर दिया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी कुरीतियों ने अनेक महिलाओं का वैवाहिक जीवन और भविष्य दोनों प्रभावित किए हैं.
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