UP News: वृंदावन में लंबे समय से चली आ रही सीवर व्यवस्था की समस्याओं को दूर करने के लिए जल निगम ने बड़े स्तर पर सुधार योजना तैयार की है. प्रारंभिक सर्वे में सामने आया है कि शहर के हजारों घर अब भी सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं, जबकि कई इलाकों में सीवर लाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इन कमियों को दूर करने के लिए करीब 240 करोड़ की परियोजना तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा.
सर्वे में सामने आई बड़ी जरूरत
जल निगम द्वारा किए जा रहे सर्वे के अनुसार नगर के करीब 22,703 घरों में सीवर कनेक्शन नहीं हैं. इसके अलावा नगर निगम के सभी 11 वार्डों में लगभग 106 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाने की आवश्यकता पाई गई है. अधिकारियों का मानना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती आबादी के कारण मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, जिससे कई क्षेत्रों में सीवर संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं.
15 साल बाद बड़े सुधार की तैयारी
वृंदावन में वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार की समग्र विकास योजना के तहत सीवर सिस्टम को बेहतर बनाने का कार्य किया गया था. इसके बाद पिछले डेढ़ दशक में बड़े स्तर पर कोई व्यापक सुधार नहीं हुआ. अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और शहर के विस्तार को देखते हुए जल निगम ने सीवर नेटवर्क को मजबूत करने की योजना बनाई है.
पुरानी लाइनों की मरम्मत भी होगी
योजना के तहत केवल नई सीवर लाइन बिछाने का ही काम नहीं होगा, बल्कि जर्जर और क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत भी की जाएगी. जिन इलाकों में आबादी का घनत्व अधिक है, वहां सीवर लाइन की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा ताकि भविष्य में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो जैसी समस्याओं से राहत मिल सके.
पहले नहीं मिली थी मंजूरी
अधिकारियों के अनुसार इससे पहले मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के सीवर सिस्टम के व्यापक सुधार के लिए 1,382 करोड़ रुपये का प्रस्ताव नगरीय विकास मंत्रालय को भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल सकी. अब नए सर्वे के आधार पर संशोधित योजना तैयार की जा रही है.
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को मिलेगी राहत
जल निगम नगरीय निर्माण इकाई के अधिकारियों का कहना है कि वृंदावन देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में मजबूत सीवर व्यवस्था न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी जरूरी है. सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा, ताकि परियोजना को जल्द मंजूरी मिल सके.
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