UP News: लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के बांदा मंडल में तैनात रहे तत्कालीन सहायक मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (ADSTE) गिरिजेश कुमार गौर को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह मामला वर्ष 2016 में सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था.
बिल पास कराने के बदले मांगी थी रिश्वत
सीबीआई के अनुसार, 27 मई 2016 को एक ठेकेदार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था. शिकायत में आरोप था कि रेलवे कार्यालय में अनुबंध के तहत वाहन उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार के करीब 80 हजार रुपये के बिल पास कराने और स्वीकृत करने के बदले तत्कालीन एडीएसटीई गिरिजेश कुमार गौर ने 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की. इसमें 10 हजार रुपये पहले और शेष 10 हजार रुपये बिल पास होने के बाद देने की बात कही गई थी.
सीबीआई ने ट्रैप लगाकर किया गिरफ्तार
शिकायत की पुष्टि के बाद सीबीआई ने 27 मई 2016 को ट्रैप बिछाया. जांच एजेंसी ने आरोपी को उसके आवास पर 9,700 रुपये की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. यह रकम कथित तौर पर मांगी गई पहली किस्त का हिस्सा थी.
करीब दस साल बाद आया फैसला
मामले की जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 24 जून 2016 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद विशेष अदालत में सुनवाई चली. करीब दस वर्ष की न्यायिक प्रक्रिया के बाद लखनऊ की सीबीआई विशेष अदालत ने गिरिजेश कुमार गौर को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई.
