UP Crime News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में पड़ोसी को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की साजिश में नौ वर्षीय बेटी अनम की हत्या के मामले में अदालत ने पिता समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय विजय कुमार हिमांशु ने मामले को जघन्यतम अपराध मानते हुए अनीस को जीवित रहते जेल से रिहा न करने का आदेश दिया. अदालत ने सभी दोषियों पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
पिता समेत पांच लोगों को उम्रकैद
मामला पीलीभीत के अमरिया थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव का है. अदालत ने अनम के पिता अनीस, उसके तीन भाइयों शादाब, नसीम और सलीम तथा पिता शहजादे को दोषी करार दिया. सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अनीस के संबंध में स्पष्ट किया कि उसे जीवित रहते जेल से रिहा न किया जाए.
पड़ोसी को फंसाने के लिए रची थी साजिश
मामले के अनुसार, पड़ोसी शकील ने अनीस और उसके भाई शादाब के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था. शकील के मुकदमा वापस नहीं लेने पर अदालत से वारंट भी जारी हो गया था. इसके बाद 2 दिसंबर 2022 को सरेन्दा पट्टी में लगे उर्स मेले के दौरान अनीस ने अपने पिता और तीन भाइयों के साथ मिलकर शकील को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची.
नींद की गोली देकर अनम की हत्या
आरोपी अनम को मेले से पास के खेत में ले गए. वहां उसे नींद की गोली दी गई, जिससे वह बेहोश हो गई. इसके बाद अनीस ने उसके सिर पर ईंट से वार किया. आरोप है कि इसके बाद अनम के हाथ-पैर पकड़े गए और चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई. घटना के बाद अनीस ने खुद ही पड़ोसी शकील के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज करा दी.
वीडियो बनाने से परिजनों पर हुआ शक
पुलिस जांच के दौरान घटना के अगले दिन अनम की तलाश का दिखावा करते हुए उसका चाचा नसीम घटनास्थल पर पहुंचा. पुलिस के मुताबिक, अस्पताल ले जाने के बजाय वह वहां वीडियो बनाने लगा. लहूलुहान बच्ची का वीडियो बनाए जाने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने परिजनों को संदेह के घेरे में लिया और चार संदिग्धों को हिरासत में लिया. जांच में खून से सनी एक पैंट भी बरामद हुई. पूछताछ के दौरान आरोपियों के जुर्म कबूल करने की बात सामने आई.
कोर्ट ने कहा- अपराध क्षमा योग्य नहीं
अदालत ने मामले की परिस्थितियों को गंभीर और जघन्य माना. कोर्ट ने कहा कि मासूम बच्ची को नींद की गोली देकर अचेत करना, इसके बाद ईंट और चाकू से उसकी हत्या करना और मामले की जांच को गुमराह करने की कोशिश करना बेहद गंभीर अपराध है. अदालत ने इसे क्षमा योग्य नहीं माना और पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.
