UP News: लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में धर्मांतरण से जुड़े एक कथित गिरोह को लेकर की गई पड़ताल में चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं. गरीब परिवारों के बच्चों और Zen-z युवाओं को अंग्रेजी पढ़ाने के बहाने प्रार्थना सभाओं में बुलाया जाता था. वहीं, गिरोह से जुड़े लोगों को पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों की पूछताछ से बचने के तरीके बताए जाने का भी दावा किया गया है.
अंग्रेजी पढ़ाने के बहाने प्रार्थना सभा में बुलाने का आरोप
मोहनलालगंज के कई गांवों में बच्चों को शिक्षित करने के नाम पर एकत्र करने और अंग्रेजी पढ़ाने के बहाने ईसाई धर्म से जुड़ी प्रचार सामग्री देने का आरोप है. बच्चों को प्रार्थना सभा में शामिल होने और बाइबिल पढ़ने के लिए भी कहा जाता था. भदेसुवा गांव के मजरा नया खेड़ा में रविवार को आयोजित चंगाई सभा में बच्चों और युवाओं की संख्या अधिक देखी गई.
पुलिस और एजेंसियों की पूछताछ को लेकर दिए गए निर्देश
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार , 26 जून को धर्मांतरण से जुड़े लोगों की एक आकस्मिक बैठक बुलाई गई थी. इसमें कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई से बचने के उपाय बताए गए. लोगों से कहा गया कि पुलिस के बुलाने पर तुरंत थाने न जाएं और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को जानकारी दें. थाने जाना पड़े तो वकील को साथ ले जाने की सलाह भी दी गई. केंद्रीय एजेंसियों की नजर होने की बात कहते हुए ईडी, सीबीआई, स्थानीय अभिसूचना इकाई या पुलिस की पूछताछ में कम बोलने के निर्देश दिए जाने का भी दावा है. रुपये के लेनदेन पर सवाल होने पर उसे पारिवारिक उपहार बताने की बात कही गई.
20 साल पहले भी चंगाई सभा को लेकर हुआ था विवाद
गौरा में बने यीशु दरबार में वर्ष 2006 में भी चंगाई सभा को लेकर विवाद हुआ था. विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन जिला अध्यक्ष राजकुमार की अगुवाई में सभा की आड़ में धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध किया गया था. विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों में पथराव हुआ था और पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. उस समय हिंदू संगठन के चार सदस्यों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी. वहीं, रविवार को दी गई तहरीर पर अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.
चर्च की जमीन की भी राजस्व विभाग ने शुरू की जांच
नया खेड़ा में चंगाई सभा के दौरान हुए विवाद का पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है. मोहनलालगंज पुलिस ने अब तक की कार्रवाई और सभा से संबंधित रिपोर्ट पुलिस आयुक्त को भेज दी है. दूसरी ओर, राजस्व विभाग की टीम ने भदेसुवा गांव स्थित चर्च की जमीन के दस्तावेजों की जांच की. शुरुआती जांच में सामने आया कि करीब 20 साल पहले राजेश गौतम से जमीन खरीदी गई थी और गाटा में कई हिस्सेदार हैं. तहसीलदार मंगलवार को मौके पर जाकर जांच करेंगे. चर्च में रहने वाले चंद्रिका राजस्व विभाग को दस्तावेज नहीं दिखा सके. प्रारंभिक जांच में जमीन पशुचर की नहीं मिली है.
