UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में नगर निगम की पारिवारिक पेंशन में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. रबिश विभाग से सेवानिवृत्त मोटर फिलर लक्ष्मी की मौत के बाद एक महिला खुद को उनकी पत्नी बताकर करीब नौ साल तक पारिवारिक पेंशन लेती रही. जांच में सामने आया कि लक्ष्मी की असली पत्नी रातो देवी की मौत करीब 20 साल पहले ही हो चुकी थी. जांच के मुताबिक, महिला ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर 9.09 लाख रुपये की पेंशन प्राप्त की.Fake Wife Drew Pension for 9
2017 में शुरू हुआ पेंशन का सिलसिला
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले रबिश विभाग में मोटर फिलर के पद पर कार्यरत लक्ष्मी पुत्र बाबू 28 फरवरी 2010 को सेवानिवृत्त हुए थे. सेवानिवृत्ति के समय उन्होंने बताया था कि उनकी पत्नी रातो देवी का निधन करीब 20 साल पहले हो चुका है. उन्होंने अपने बेटे सुजीत को नॉमिनी बनाया था. लक्ष्मी की 26 फरवरी 2017 को मौत हो गई. इसके बाद लक्ष्मिन नाम की महिला ने खुद को लक्ष्मी की पत्नी बताते हुए नगर निगम से पारिवारिक पेंशन की मांग की. स्वास्थ्य विभाग के पटल सहायक की संस्तुति के आधार पर वित्त विभाग ने 27 दिसंबर 2017 से ‘लक्ष्मिन पत्नी लक्ष्मी’ के नाम पर पारिवारिक पेंशन का भुगतान शुरू कर दिया.
नौ साल तक नहीं लगी किसी को भनक
लक्ष्मिन करीब नौ साल तक पारिवारिक पेंशन लेती रही. इस दौरान विभाग को इसकी जानकारी नहीं हुई. बाद में चीफ फाइनेंस एंड अकाउंट ऑफिसर (सीएफएओ) की जांच में मामला सामने आया. नगर निगम के मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने 10 जून 2026 को जांच के बाद आपत्ति दर्ज की कि लक्ष्मिन गलत तरीके से पेंशन ले रही है. मामले की जानकारी नगर आयुक्त को दी गई. इसके बाद नगर आयुक्त ने कार्रवाई के लिए सीएफएओ को निर्देश दिए.
खुद नगर निगम की सफाईकर्मी रह चुकी है महिला
जांच रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने अपने दावे के समर्थन में एसडीएम सदर कार्यालय का पारिवारिक सजरा पेश किया था, जिसे पार्षद से प्रमाणित बताया गया था. प्राथमिक जांच में यह सजरा भी कूटरचित प्रतीत हुआ. जांच में यह भी सामने आया कि महिला खुद नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में सफाईकर्मी रह चुकी है. वह 2016 में सेवानिवृत्त हुई थी और अपनी अलग पेंशन भी प्राप्त कर रही थी. उसकी सेवा पत्रावली में पति का नाम सत्यनारायण दर्ज है. इसके बावजूद वह लक्ष्मी की पत्नी के रूप में पारिवारिक पेंशन लेती रही.
पटल सहायक की भूमिका पर भी उठे सवाल
वरिष्ठ लिपिक की रिपोर्ट में रबिश विभाग के पटल सहायक की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जरूरी तथ्यों और दस्तावेजों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया. इसी वजह से पेंशन का भुगतान लंबे समय तक जारी रहा. हालांकि, सीएफएओ की अंतिम रिपोर्ट में अकाउंट विभाग को दोषमुक्त बताया गया है. रिपोर्ट में जिम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित विभाग की संस्तुति प्रक्रिया पर डाली गई है. सीएफएओ के अनुसार, रबिश विभाग ने पत्रावली का परीक्षण और अनुमोदन नियमानुसार नहीं किया.
दोषी मिले तो कर्मचारियों पर भी होगी कार्रवाई
नगर निगम की ओर से मामले की जांच कराई जा रही है. अधिकारियों के अनुसार, आरोपी महिला के अलावा जांच में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, महिला से गलत तरीके से प्राप्त की गई पेंशन की रकम की रिकवरी भी की जाएगी.
Must Read: राखी का हजारों साल पुराना अनसुना इतिहास, आखिर कैसे भाई-बहन के प्रेम का त्योहार बन गया रक्षाबंधन?
