UP Politics News: उत्तर प्रदेश में हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. बसपा प्रमुख मायावती ने मामले को आपसी बातचीत से सुलझाने की सलाह दी है, जबकि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संविधान के अधिकारों के खिलाफ बताया है.
क्या कहा हाईकोर्ट ने
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस जे. जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने हिजाब से जुड़ी याचिका खारिज कर दी. अदालत के मुताबिक याचिकाकर्ता छात्रा यह साबित नहीं कर सकी कि हिजाब इस्लाम में ऐसा अनिवार्य धार्मिक अभ्यास है, जिसके बिना उसकी धार्मिक आस्था प्रभावित होगी. इसी आधार पर स्कूल में हिजाब की अनुमति देने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया.
ओवैसी ने फैसले पर उठाए सवाल
वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 में दिए गए अधिकारों के विपरीत है. उन्होंने सवाल उठाया कि इस्लाम में कौन-सी चीज जरूरी है, इसका फैसला अदालत कैसे कर सकती है. ओवैसी ने फैसले को इस्लाम पर हमला भी बताया.
मायावती ने दी बातचीत की सलाह
मायावती ने कहा कि संविधान सभी धर्मों और समुदायों को समान अधिकार देता है और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने स्कूल यूनिफॉर्म, चादर और हिजाब जैसे संवेदनशील मुद्दों को अदालत तक ले जाने के बजाय स्कूल प्रबंधन और प्रशासन के स्तर पर बातचीत से सुलझाने की बात कही. उनका कहना है कि ऐसे मामलों को राजनीतिक विवाद बनने से रोकना जरूरी है.
मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व की भी बात
हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मुसलमानों की अपनी राजनीतिक लीडरशिप होनी चाहिए. ओवैसी ने मुस्लिम आबादी और संसद में उनके प्रतिनिधित्व का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा संख्या समुदाय की आवाज को पर्याप्त मजबूती नहीं देती.
