एक ऐसा कैदी, जिसकी रिहाई पर खुद राज्यपाल ने लगाई रोक, क्या है इसकी कहानी?

Up Governor: बांग्लादेशी आतंकी संगठन से जुड़े फिदायीनों की घुसपैठ में दोषी फरहान की समयपूर्व रिहाई की याचिका राज्यपाल ने खारिज कर दी है. 2006 में गिरफ्तार और 2008 में उम्रकैद की सजा पाए फरहान ने 19 साल जेल में काटे हैं. उसकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है.

लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी फरहान, जो बांग्लादेश से संचालित फिदायीन आतंकी संगठन हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी (HuJI) के आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने में संलिप्त था, अब जेल से समयपूर्व रिहा नहीं हो सकेगा. राज्यपाल ने उसकी समयपूर्व रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया है. फरहान वर्तमान में वाराणसी जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है.

2006 में गिरफ्तार, 2008 में उम्रकैद की सजा

फरहान को वर्ष 2006 में चार साथियों के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उस पर आरोप था कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर बांग्लादेश से फिदायीन आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराई थी. यह आतंकी संगठन देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त था. मामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 23 जनवरी 2008 को फरहान को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

अब तक 19 साल की सजा काट चुका है फरहान

वाराणसी जेल में बंद फरहान ने लगभग 19 वर्ष की सजा काट ली है. इसके बाद उसने समयपूर्व रिहाई के लिए याचिका दाखिल की थी. उसकी याचिका की समीक्षा के दौरान लखनऊ जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और प्रोबेशन बोर्ड ने उसकी रिहाई की संस्तुति नहीं की.

हाईकोर्ट में अपील अभी लंबित, शासन ने जारी किया आदेश

फरहान की सजा के खिलाफ अपील फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है. इसके बावजूद राज्यपाल ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे गम्भीर अपराध में शामिल व्यक्ति की समयपूर्व रिहाई संभव नहीं है. शासन ने इस संबंध में कारागार विभाग को आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि फरहान की रिहाई की प्रक्रिया पूरी तरह से निरस्त रहे.

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Author: Abhishek Singh

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