जाति नहीं, 2027 में यूपी की बाजी पलट सकता है ये ‘M’ फैक्टर, सीएम योगी से अखिलेश यादव तक क्यूँ हैं इस साइलेंट पावर पर मेहरबान

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में सियासी समीकरण बदल सकते हैं. इस बार महिला वोटर 'M' फैक्टर बनकर उभर रही हैं, जो चुनावी रणनीति का बड़ा केंद्र बन गई हैं. 7 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं पर सभी राजनीतिक दलों की नजर है.

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में सियासी मुकाबला सिर्फ जाति और पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं रहने वाला है. इस बार ‘M’ यानी महिला वोटर चुनावी रणनीति का बड़ा केंद्र बनकर उभरी हैं. चुनावी आंकड़ों के अनुसार यूपी में 7 करोड़ से अधिक महिला मतदाता हैं, जो कुल वोटरों का करीब 47 प्रतिशत हिस्सा हैं. इतनी बड़ी संख्या के कारण राजनीतिक दलों की नजर अब आधी आबादी पर पहले से कहीं ज्यादा केंद्रित हो गई है.

वोटिंग में पुरुषों से आगे रहीं महिलाएं

पिछले चुनावों के मतदान आंकड़े महिला वोटरों की बढ़ती ताकत को साफ दिखाते हैं. 2022 विधानसभा चुनाव में जहां पुरुषों का मतदान प्रतिशत 59.56 रहा, वहीं महिलाओं ने 62.24 प्रतिशत वोटिंग की. 2024 लोकसभा चुनाव में भी महिला मतदान पुरुषों से आगे रहा. पुरुषों का मतदान 56.46 प्रतिशत रहा, जबकि महिलाओं ने 57.22 प्रतिशत वोट डाले. यही लगातार बढ़ती भागीदारी राजनीतिक दलों को महिला वोटरों के लिए अलग और खास रणनीति बनाने पर मजबूर कर रही है.

योगी सरकार से लेकर अखिलेश तक महिलाओं पर फोकस

बीजेपी और योगी सरकार महिलाओं के लिए सुरक्षा, सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश में हैं. वहीं समाजवादी पार्टी महिलाओं को सीधे आर्थिक लाभ देने की रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. सपा ने सत्ता में आने पर महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने, छात्राओं को मुफ्त बस-मेट्रो यात्रा और 12वीं पास छात्राओं को लैपटॉप देने जैसे वादे किए हैं. इससे साफ है कि 2027 से पहले महिला वोटर सभी प्रमुख दलों के चुनावी एजेंडे में अहम स्थान हासिल कर चुकी हैं.

जाति से ऊपर नहीं, लेकिन फैसले में बन सकती हैं निर्णायक

महिलाएं किसी एक समान वोट बैंक का हिस्सा नहीं हैं और उनकी जातीय, सामाजिक व धार्मिक पहचान भी चुनावी फैसलों को प्रभावित करती रहेगी. हालांकि सुरक्षा, मुफ्त यात्रा, शिक्षा और सीधे आर्थिक लाभ जैसे मुद्दे महिलाओं को परिवार के पुरुष सदस्यों से अलग राजनीतिक फैसला लेने का आधार दे सकते हैं. खासकर करीबी मुकाबले वाली सीटों पर महिला वोटरों का एक से दो प्रतिशत का झुकाव भी हार और जीत का पूरा समीकरण बदलने की ताकत रखता है.

2027 का सबसे बड़ा सवाल- किसके साथ जाएंगी महिलाओं की ताकत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यूपी के चुनाव में सिर्फ यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं रहेगा कि कौन सी जाति किस पार्टी के साथ है, बल्कि यह भी अहम होगा कि उन जातियों की महिलाएं किसे समर्थन दे रही हैं. वेलफेयर योजनाओं की डिलीवरी, सुरक्षा का भरोसा, यात्रा की सुविधा और सीधे आर्थिक लाभ महिला वोटरों के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं. 2027 के चुनाव में 7 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं की यह ‘साइलेंट फोर्स’ कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकती है और यूपी की सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखने वाला सबसे बड़ा नया चुनावी फैक्टर बन सकती है.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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