UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी बिसात तेजी से बदल रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां बीजेपी की कमजोर पड़ी सीटों पर सीधे फोकस कर रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपनी चुनावी रणनीति को नए सामाजिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष के सामाजिक गठजोड़ और 2024 के चुनावी प्रदर्शन के मोर्चे पर अखिलेश फिलहाल योगी से आगे दिखाई दे रहे हैं. हालांकि इसे 2027 की जीत का संकेत मानना जल्दबाजी होगी.
2024 में अखिलेश ने दिखा दिया था अपना दम
2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई. सपा-कांग्रेस गठबंधन ने कई ऐसे क्षेत्रों में बढ़त बनाई, जिन्हें बीजेपी का मजबूत इलाका माना जाता था. इसी चुनावी नतीजे ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए विपक्ष को नई ऊर्जा दी है. बीजेपी अब इसी नुकसान की भरपाई के लिए अपनी रणनीति बदल रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मई 2026 से 44 से अधिक जिलों का दौरा किया है और करीब 115 विधानसभा क्षेत्रों में 38 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया है. इनमें बड़ी संख्या उन सीटों की है, जहां 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन मजबूत रहा था.
लेकिन अखिलेश ने भी बदल दिया अपना गेम
अखिलेश यादव की रणनीति अब सिर्फ यादव-मुस्लिम समीकरण तक सीमित रखने की कोशिश नहीं दिख रही है. सपा ने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को और विस्तार देने की तैयारी की है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार सपा दलित बहुल इलाकों में 'संविधान बचाओ PDA जन पंचायत' जैसे कार्यक्रमों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रही है. पार्टी सुरक्षित विधानसभा सीटों पर भी विशेष ध्यान देने वाली है.
युवाओं पर भी अखिलेश का फोकस
2027 की लड़ाई में युवा वोटर बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक सपा युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है. दूसरी तरफ बीजेपी और योगी सरकार भी युवाओं और महिलाओं के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है. यानी मुकाबला अब सिर्फ रैलियों और भाषणों का नहीं है. युवा, महिला, पिछड़ा, दलित और पहली बार वोट डालने वाले मतदाता—2027 की असली लड़ाई इन्हीं वर्गों के बीच दिखाई दे रही है.
योगी ने 115 सीटों पर लगाया जोर, अखिलेश का जवाब क्या?
योगी आदित्यनाथ का 115 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें से 67 सीटों पर 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने बढ़त बनाई थी. बीजेपी ने 47 सीटों पर और आरएलडी ने एक सीट पर बढ़त बनाई थी. इससे साफ है कि बीजेपी अब 2024 के नुकसान वाले इलाकों को वापस लेने की कोशिश में जुटी है. वहीं अखिलेश के सामने चुनौती यह है कि 2024 के लोकसभा प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में भी दोहराया जाए. इसके लिए उन्हें अपने PDA आधार को और मजबूत करने के साथ-साथ उन सामाजिक समूहों तक भी पहुंच बनानी होगी, जहां बीजेपी की पकड़ मजबूत है.
तो क्या 2027 में अखिलेश आगे हैं?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. 2027 के विधानसभा चुनाव में 403 सीटों पर मुकाबला होना है और बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिए. चुनाव तक गठबंधन, उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और सामाजिक समीकरण कई बार बदल सकते हैं.
लेकिन एक बात जरूर है—2024 के बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी को यह एहसास करा दिया है कि यूपी की चुनावी लड़ाई अब एकतरफा नहीं रही. यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ खुद उन क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जहां विपक्ष ने पिछला लोकसभा चुनाव मजबूत होकर लड़ा था.
अब असली सवाल यही है—क्या अखिलेश 2024 वाला फॉर्मूला 2027 की विधानसभा में दोहरा पाएंगे या योगी 115 सीटों के मिशन से पिछला हिसाब बराबर कर देंगे?
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