UP Politics: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी राज्य में सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है. इस विशेष अभियान के अंतर्गत सितंबर माह से विभिन्न जनपदों में 200 से अधिक विशाल सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा. इन सम्मेलनों की संपूर्ण जिम्मेदारी विचार विभाग को सौंपी गई है, जिससे जमीनी स्तर पर दलित और पिछड़े समुदायों को गोलबंद किया जा सके.
ज़िलों में जनसभाओं का आयोजन और विचार विभाग को मिली नई ज़िम्मेदारियाँ
उत्तर प्रदेश प्रभारी के निर्देशानुसार पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर जनसमर्थन जुटाएंगे। इस मुहिम को सफल बनाने हेतु विचार विभाग के राष्ट्रीय नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं के साथ रणनीतिक बैठकें आयोजित की हैं. राज्य के 30 से 40 प्रतिशत ज़िलाध्यक्षों के फेरबदल से पूर्व इन कार्यक्रमों को संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है. शुरुआती चरण में गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आज़मगढ़, अयोध्या, झांसी और सिद्धार्थनगर जैसे प्रमुख राजनीतिक केंद्रों में सम्मेलनों के आयोजन पर अंतिम सहमति बन चुकी है.
पुस्तिकाओं का वितरण और बुद्धिजीवियों के माध्यम से नए समीकरण साधने की कोशिश
आगामी सप्ताह में सम्मेलनों की निश्चित तिथियां घोषित कर दी जाएंगी. इन आयोजनों के दौरान पार्टी की मूल विचारधारा तथा शीर्ष नेतृत्व द्वारा उठाए गए सामाजिक न्याय के मुद्दों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा. इसके लिए एक विशेष पुस्तिका प्रकाशित की जा रही है, जिसे दलित एवं पिछड़े वर्ग के बुद्धिजीवियों तथा प्रभावशाली नागरिकों के मध्य वितरित किया जाएगा. कांग्रेस इस संगठनात्मक कवायद के ज़रिए राज्य में अपने घटते जनाधार को पुनर्जीवित कर 2027 चुनाव हेतु ठोस धरातल तैयार करना चाहती है.
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