यूपी में शिक्षा व्यवस्था के दो बड़े फैसले, मिड-डे मील और शिक्षक तैनाती पर विवाद

Up News: उत्तर प्रदेश सरकार ने मिड-डे मील योजना के संचालन में बड़ा बदलाव करते हुए ग्राम प्रधानों की भूमिका समाप्त कर दी है. वहीं, बालिका इंटर कॉलेज में पुरुष प्रधानाचार्य की नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया है.

Up News उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों की मिड-डे मील योजना के संचालन में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है. महानिदेशालय स्कूली शिक्षा द्वारा जारी पत्र के अनुसार अब ग्राम प्रधानों का हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. नई व्यवस्था के तहत विद्यालय प्रबंध समिति (वीएमसी) के अध्यक्ष, जो छात्र के अभिभावक होते हैं, और विद्यालय के प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से खाते का संचालन संभालेंगे. रसोइयों का मानदेय तथा भोजन पकाने हेतु मिलने वाली कंटीजेंसी राशि का भुगतान भी अब इन्हीं के अधिकार क्षेत्र में रहेगा.

ग्राम प्रधानों का विरोध प्रदर्शन

शासन के इस आदेश पर राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने तीव्र विरोध दर्ज कराया है. संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा का कहना है कि कार्यकाल पूर्ण होने के उपरांत भी ग्राम प्रधान प्रशासक के पद पर निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में उन्हें मिड-डे मील की जिम्मेदारियों से हटाना सीधा उनके अधिकारों में कटौती करना है. प्रधान संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस फैसले को तत्काल वापस लेकर पूर्व की स्थिति को पुनः बहाल किया जाना चाहिए.

बालिका इंटर कॉलेज में पुरुष प्रधानाचार्य पर विवाद

माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नति प्राप्त 326 समूह-ख के अधिकारियों को नई नियुक्तियाँ दी गई हैं. हालाँकि, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज धनूपुर प्रयागराज में कैलाश यादव की प्रधानाचार्य पद पर तैनाती से विवाद खड़ा हो गया है. राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने बालिका विद्यालय में पुरुष प्रधानाचार्य की नियुक्ति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है. संघ के प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव और संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को पत्र भेजकर इस फैसले को तत्काल निरस्त करने की मांग की है.

विद्यालयों में रिक्त पद और अव्यवस्थाएँ

शिक्षक संघ ने बेसिक अनुभाग में की गई नियुक्तियों को अनुचित बताते हुए खाली पड़े पदों की ओर ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने मांग की कि अधिकारियों को बेसिक से हटाकर रिक्त राजकीय विद्यालयों में पदस्थ किया जाए. संघ ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मानिकपुर चित्रकूट और मुसाफिरखाना अमेठी में नियमित प्राचार्या न होने का मुद्दा उठाया है. उनका दावा है कि चित्रकूट में पिछले 12 वर्षों से नियमित प्राचार्या नहीं हैं, जिससे भारी प्रशासनिक अनियमितताएँ हो रही हैं.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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