यह आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की अवकाशकालीन पीठ ने संजय प्रसाद की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर पारित किया. प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इलाहाबाद हाई कोर्ट के गत 3 जून के एक आदेश में उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को चुनौती देते हुए उन्हें रद करने की मांग की थी. विशेष अनुमति याचिका में कहा गया था कि हाई कोर्ट ने याचिका में मांगे गए अनुतोष से बाहर जाकर उनके खिलाफ टिप्पणियां कीं और आदेश पारित किया, जिसका कोई औचित्य नहीं था.
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने 3 जून को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि आपराधिक जांच को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए दिए गए न्यायिक निर्देशों को प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है. इसी क्रम में हाई कोर्ट ने एसीएस (गृह) संजय प्रसाद पर भी प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं. संजय प्रसाद ने इन टिप्पणियों और निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मामले पर विचार करते हुए हाई कोर्ट के प्रतिकूल अवलोकनों और डीओपीटी को भेजे गए निर्देशों के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी.
सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद के खिलाफ हाई कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उन निर्देशों के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी, जिनमें बतौर अपर मुख्य सचिव (गृह) उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं.

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)