UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में प्रतियोगी परीक्षा में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है. यूपी एसटीएफ ने सचेंडी थाना क्षेत्र स्थित परीक्षा केंद्र पर कार्रवाई करते हुए सॉल्वर गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें दो अभ्यर्थी और दो सॉल्वर शामिल हैं. आरोप है कि गैंग फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के जरिए अभ्यर्थियों को परीक्षा में सहायक की सुविधा दिलाता था और उनकी जगह पेशेवर सॉल्वर से परीक्षा कराता था. इसके बदले लाखों रुपये की रकम वसूली जाती थी.
बैंक पीओ और मैनेजर भर्ती परीक्षा में सेंध की कोशिश
मामला सहभागी और सहकारी क्षेत्र के बैंक में पीओ और मैनेजर भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा से जुड़ा है. एसटीएफ को परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी. इसके बाद टीम ने जांच शुरू की और परीक्षा के दौरान ही चार लोगों को पकड़ लिया. गिरफ्तार आरोपियों में कानपुर निवासी अवनीश यादव और अंकित सचान अभ्यर्थी बताए गए हैं, जबकि बिहार से आए आशीष कुमार और राहुल कुमार सिन्हा सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने पहुंचे थे.
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से तैयार होता था पूरा खेल
जांच में सामने आया कि गिरोह पहले सामान्य अभ्यर्थियों को दिव्यांग दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करता था. इसके बाद दिव्यांग अभ्यर्थी को परीक्षा में सहायक की सुविधा मिलने का फायदा उठाया जाता था. इसी व्यवस्था की आड़ में पेशेवर सॉल्वर को अभ्यर्थी का सहायक बनाकर परीक्षा केंद्र में भेजा जाता था. सॉल्वर अभ्यर्थी की जगह प्रश्नपत्र हल करता था.
लाखों रुपये में होती थी परीक्षा पास कराने की डील
एसटीएफ की जांच के मुताबिक, परीक्षा पास कराने के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की रकम ली जाती थी. पत्रिका की रिपोर्ट में एक मामले में करीब 10 लाख रुपये में सौदा होने की बात सामने आई है. वहीं एक अन्य अभ्यर्थी के लिए सॉल्वर को 30 हजार रुपये देने की जानकारी भी जांच में सामने आयी है.
बिहार से बुलाये गये थे सॉल्वर
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार सॉल्वर आशीष कुमार मधुबनी, बिहार और राहुल कुमार सिन्हा शेखपुरा सराय, बिहार के रहने वाले हैं. दोनों परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे. एसटीएफ ने परीक्षा के दौरान ही दोनों को पकड़ लिया.
नेटवर्क के सरगना की तलाश तेज
पूछताछ के दौरान एसटीएफ को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष कुमार मिश्रा और राजू गुप्ता की भूमिका गिरोह के संचालन में बतायी जा रही है. दोनों की तलाश की जा रही है. एसटीएफ यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने इससे पहले कितनी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कराया है और इसमें कितने लोग शामिल हैं.
परीक्षा व्यवस्था की आड़ में नौकरी का खेल
इस कार्रवाई ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के एक ऐसे तरीके को उजागर किया है, जिसमें दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलने वाली सहायक सुविधा का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा था. अब जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं. यूपी एसटीएफ का गठन संगठित अपराध और ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया गया है और इसका कार्यक्षेत्र पूरे उत्तर प्रदेश में है.
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