कलंक से कीर्ति तक गुलवीर का गांव सिरसा,राष्ट्रमंडल खेलों में बढ़या भारत का गौरव

UP News: एक समय चोरी-डकैती के लिए बदनाम रहा सिरसा गांव आज सेना में भर्ती और खेल प्रतिभाओं के लिए जाना जाता है. अंतरराष्ट्रीय धावक गुलवीर सिंह की सफलता ने गांव की तस्वीर बदल दी है और युवा पीढ़ी को प्रेरित किया है.

करीब चार दशक पूर्व अलीगढ़ का सिरसा गांव चोरी और डकैती जैसी सामाजिक बुराइयों के कारण अत्यधिक बदनाम था. समय के साथ गांव के निवासियों की सोच बदली और युवाओं ने देश सेवा का मार्ग चुनकर गांव का कलंक मिटा दिया. लगभग छह हजार की आबादी वाले इस गांव के लगभग 300 जवान सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 200 से अधिक फौजी सेवानिवृत्त हो चुके हैं. आज लगभग हर परिवार से सेना में भागीदारी इस गांव की मुख्य पहचान बन चुकी है.

अंतरराष्ट्रीय धावक गुलवीर की चमक विश्व पटल पर लहराया सफलता का परचम

स्काटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 10,000 मीटर दौड़ में अंतरराष्ट्रीय धावक गुलवीर सिंह ने रजत पदक जीतकर पूरे देश और अपने गांव का मान बढ़ाया है. उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से गांव में उत्सव जैसा माहौल है. गुलवीर की उपलब्धि ने स्थानीय युवाओं में नया आत्मविश्वास जगाया है. अब यह गांव केवल फौजियों के गढ़ के रूप में ही नहीं जाना जाएगा, बल्कि खेल जगत में भी अपनी नई पहचान बनाते हुए उभरती हुई खेल प्रतिभाओं के लिए एक नई नर्सरी के रूप में विकसित हो रहा है.

पिता का विकास का संकल्प बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी

एक ओर जहाँ बेटे ने अंतरराष्ट्रीय खेल ट्रैक पर देश का तिरंगा फहराया है, वहीं उनके पिता पप्पू सिंह गांव की मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. गांव में आज भी कई कच्चे रास्ते हैं और छुइया नाले पर पुलिया न होने से ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय एथलीट देने वाले इस गांव में बुनियादी सुविधाओं का विकास प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए.

स्टेडियम निर्माण की उठती मांग आसपास के दर्जनों गांवों की प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

गांव की इस पावन मिट्टी से नए अंतरराष्ट्रीय सितारे तैयार करने के लिए गुलवीर सिंह के नाम पर आधुनिक खेल स्टेडियम बनाने की मांग तेजी से जोर पकड़ रही है. गांव में सरकारी भूमि उपलब्ध होने के कारण यह निर्माण आसानी से संभव है. यदि यहाँ स्टेडियम बनता है, तो सिरसा के साथ-साथ रसैनी, हबीलपुर और तरैंची जैसे दर्जनों आसपास के गांवों के युवा खिलाड़ियों को घर के पास ही बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा और गुलवीर के नाम का यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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