Lucknow Cyber Fraud: लखनऊ में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक तरीके को उजागर कर दिया है. जालसाजों ने परिवहन विभाग के एक रिटायर्ड रीजनल मैनेजर को कथित टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाया. कभी खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया, तो कभी डीजीपी महाराष्ट्र और सीबीआई डायरेक्टर बनकर वीडियो कॉल की. डर और दबाव के बीच पीड़ित से करीब 19 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए.
पहले कहा- आपके आधार से मुंबई में खुला सिम और बैंक अकाउंट
मामला लखनऊ के महानगर इलाके का है. शिकायत के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 को रिटायर्ड अधिकारी के पास फोन आया. कॉल करने वाले ने अपना नाम सुरेश म्हात्रे बताया और दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर मुंबई में एक मोबाइल सिम खरीदा गया है. इसी सिम के जरिए मुंबई में एक बैंक अकाउंट भी खोले जाने की बात कही गई. इसके बाद जालसाजों ने कहानी को और गंभीर बना दिया. पीड़ित को बताया गया कि कथित बैंक खाते में पाकिस्तान से 2.50 करोड़ रुपये आए हैं और इस रकम का संबंध टेरर फंडिंग से है. ठगों ने यहां तक दावा किया कि इस रकम में से 25 लाख रुपये कमीशन के तौर पर दिए गए हैं.
पुलवामा आतंकी हमले का नाम लेकर बनाया दबाव
आरोप है कि साइबर ठगों ने पीड़ित को पुलवामा आतंकी हमले और एक आतंकी से जुड़े मामले का नाम लेकर डराया. उनसे कहा गया कि उनके बैंक खाते से संदिग्ध लेनदेन हुआ है और जांच एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं. जालसाजों ने गिरफ्तारी वारंट जारी होने तक की बात कही. डर का माहौल बनाने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लिया गया. पीड़ित को वर्दी पहने एक व्यक्ति दिखाई दिया, जिसने खुद को पुलिस अधिकारी बताया. इसके बाद कथित तौर पर डीजीपी महाराष्ट्र और फिर सीबीआई डायरेक्टर से वीडियो कॉल पर बात कराने का दावा किया गया.
बच्चों के भविष्य का डर दिखाकर बनाया मानसिक दबाव
साइबर ठगों ने कथित तौर पर पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रखा. शिकायत के अनुसार, उन्हें धमकाया गया कि यदि उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति को इस मामले की जानकारी दी तो उनके बच्चों का भविष्य खराब हो सकता है. इसी मानसिक दबाव के बीच जालसाजों ने कथित जांच में सहयोग करने के नाम पर पीड़ित से अपनी एफडी तुड़वाने को कहा.
पहले 9 लाख, फिर 5-5 लाख... ऐसे निकली रकम
पीड़ित के मुताबिक, ठगों के कहने पर उन्होंने करीब 9 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर एक बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कर दी. इसके बाद भी जालसाजों का दबाव जारी रहा. शिकायत के अनुसार, इसके बाद करीब 5 लाख रुपये की एक और एफडी तुड़वाई गई और रकम दूसरे खाते में भेजी गई. फिर करीब 5 लाख रुपये और ट्रांसफर कराए गए. इस तरह कुल मिलाकर करीब 19 लाख रुपये की रकम ठगों ने कथित तौर पर अपने खातों में ट्रांसफर करा ली.
ठगी का एहसास हुआ तो पुलिस से की शिकायत
लगातार दबाव और रकम ट्रांसफर कराने के बाद जब रिटायर्ड अधिकारी को अपने साथ साइबर फ्रॉड होने का एहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की. मामला लखनऊ के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पहुंचा. पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और वीडियो कॉल में इस्तेमाल किए गए माध्यमों की जांच कर रही है, जिनके जरिए पीड़ित से संपर्क किया गया था.
साइबर ठगी का नया तरीका कितना खतरनाक?
इस मामले में जालसाजों ने सिर्फ पैसे का लालच नहीं दिया, बल्कि पुलिस, सीबीआई, टेरर फंडिंग, पाकिस्तान से पैसे आने और गिरफ्तारी जैसी बातों का इस्तेमाल कर पीड़ित में डर पैदा किया. वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी दिखाकर कथित अधिकारियों की पहचान को असली साबित करने की कोशिश की गई.
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