UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही नेताओं के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अब निजी हमलों तक पहुंच गए हैं और बयानबाजी में मर्यादा भी टूटती नजर आ रही है. इस बार विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री दयाराम प्रजापति के एक बयान से हुई, जिसमें उन्होंने सुभासपा प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर की तुलना "बिना पूंछ के गधे" से कर दी. इसके बाद ओपी राजभर ने भी बिना देर किए तीखा पलटवार किया और दयाराम प्रजापति को सपा में रहकर "लात खाते रहने" की नसीहत दे डाली. इतना ही नहीं, उन्होंने अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव पर भी गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए.
अखिलेश पर लगातार हमलावर हैं ओपी राजभर
सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर हैं. कभी मीडिया के जरिए तो कभी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से वह सपा पर निशाना साधते रहे हैं. राजभर लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी केवल यादव समाज की राजनीति करती है, जबकि गैर-यादव पिछड़े वर्ग और दलितों की लगातार उपेक्षा होती रही है. राजभर कई मौकों पर यह आरोप भी लगा चुके हैं कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में गैर-यादव ओबीसी और दलित नेताओं को सम्मान नहीं मिला. हालांकि इन आरोपों पर अखिलेश यादव ने खुद कोई सीधा जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनकी पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री दयाराम प्रजापति ने मोर्चा संभाल लिया.
दयाराम प्रजापति ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री दयाराम प्रजापति ने ओम प्रकाश राजभर पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा, "ओम प्रकाश राजभर बिना पूंछ का गधा है. उसे यह भी नहीं पता कि किससे क्या कहना चाहिए. वह एक व्यापारी हैं. हमारे यहां रहे तो समझौता किया, जहां-जहां गए वहां भी समझौता किया. पहले टिकट लेते हैं और फिर टिकट बेचते हैं. यही उनका व्यापार है. गधे को तो फिर भी अक्ल होती है, लेकिन इस बिना पूंछ वाले गधे को अक्ल ही नहीं है." दयाराम प्रजापति का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस तेज हो गई.
ओपी राजभर ने दिया करारा जवाब
दयाराम प्रजापति के बयान पर ओम प्रकाश राजभर ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "इसको लतियाकर अखिलेश जी ने जेल में भेजा था. अभी कुछ दिन पहले समाजवादियों ने इसके घर में घुसकर इसकी पत्नी के साथ मारपीट की, फिर भी इसे अक्ल नहीं आई. वहीं घुसकर लात खाते रहिए और तमाशा देखते रहिए."राजभर यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और उनसे पहले मुलायम सिंह यादव अपने नेताओं को इसी तरह की भाषा बोलने की ट्रेनिंग देते रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले भी कई नेताओं ने अलग-अलग जातियों के खिलाफ विवादित बयान दिए हैं और यह समाजवादी पार्टी की पुरानी राजनीतिक शैली रही है.
अन्य विवादित बयानों का भी किया जिक्र
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में राजकुमार भाटी के विवादित बयान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि "आपने देखा होगा कि राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज के बारे में क्या कहा था. ठाकुरों और राजभर समाज के खिलाफ भी बयान दिए गए. यह लोग लगातार अलग-अलग जातियों के खिलाफ बोलवाते रहते हैं. अब इन्हें इसी तरह की राजनीति करने की आदत हो गई है." राजभर के इस बयान के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है.
कौन हैं दयाराम प्रजापति?
दयाराम प्रजापति उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुम्हार (प्रजापति) समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं. वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं. दयाराम उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं. इसके अलावा अखिलेश यादव सरकार में उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली थी. राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए उनकी अलग पहचान है. पार्टी के भीतर भी उन्हें पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है. यही वजह है कि ओपी राजभर के लगातार हमलों के बीच समाजवादी पार्टी की ओर से जवाब देने की जिम्मेदारी दयाराम प्रजापति ने संभाली.
